बगलामुखी जयंती 2026: मां शक्ति के दिव्य रूप का विशेष दिन, जानें कैसे देवी बगलामुखी ने थाम दी थी विनाश की लहर

नई दिल्ली। सनातन धर्म में आदिशक्ति के दस महाविद्या स्वरूपों का विशेष महत्व माना जाता है, जिनमें आठवीं महाविद्या के रूप में पूजित मां बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। साल 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जा रही है। इस दिन भक्त विशेष रूप से देवी की पूजा-अर्चना कर जीवन की बाधाओं से मुक्ति और विजय की कामना करते हैं।
पीतांबरा देवी के रूप में पूजित हैं मां बगलामुखी
मां बगलामुखी को पीतांबरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनका स्वरूप पीले वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी अपने भक्तों के शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और शक्ति को निष्क्रिय कर देती हैं। यही कारण है कि न्याय, सुरक्षा और विजय की कामना रखने वाले साधक उनकी विशेष आराधना करते हैं। तंत्र साधना में भी उनका महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
जब सृष्टि पर मंडराया था विनाश का संकट
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक समय ऐसा आया जब भीषण तूफान और प्राकृतिक आपदाओं ने पूरी पृथ्वी को घेर लिया। चारों ओर विनाश का भयावह दृश्य था और सृष्टि का अस्तित्व संकट में पड़ गया था। तब भगवान विष्णु ने इस संकट से मुक्ति के लिए भगवान शिव का आश्रय लिया।
भगवान शिव के मार्गदर्शन पर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति की कठोर तपस्या की। उनकी साधना से प्रसन्न होकर आदिशक्ति हरिद्रा झील से बगलामुखी स्वरूप में प्रकट हुईं। उनके प्रकट होते ही भयंकर तूफान शांत हो गया और सृष्टि का संतुलन पुनः स्थापित हो गया। तभी से देवी को विनाश को शांत करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है।
बगलामुखी जयंती का विशेष धार्मिक महत्व
इस दिन मां बगलामुखी की पूजा, मंत्र जाप और हवन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन की गई साधना कई गुना अधिक फल देती है। खासतौर पर शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामलों, मानसिक तनाव और भय से मुक्ति पाने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
भक्त इस अवसर पर पीले वस्त्र धारण करते हैं और पीले फूल, हल्दी आदि से देवी की पूजा करते हैं। धार्मिक आस्था के अनुसार, सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।



