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Bangladesh: हसीना के सत्ता छोड़ने से पहले ही यूनुस को कमान सौंपने की तैयारी? AFP पत्रकार की भूमिका पर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली: बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन को लेकर एक नया दावा सामने आया है। इसके मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने से पहले ही मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने के लिए संपर्क साधने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इस कथित पहल में समाचार एजेंसी एएफपी के एक पत्रकार की भूमिका भी सामने आई है। यह दावा यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव और एएफपी के पूर्व पत्रकार शफीकुल आलम ने किया है। उनके मुताबिक, छात्र आंदोलन के नेता मोहम्मद यूनुस तक अपना संदेश पहुंचाना चाहते थे और एएफपी की फैक्ट-चेक टीम के संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराने में मदद की थी। इस दावे के बाद बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि और उससे पहले हुई गतिविधियों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

ढाका स्थित AFP कार्यालय से गोपनीय संपर्क का दावा

शफीकुल आलम ने फेसबुक पर साझा की गई पोस्ट में बताया कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज होने के दौरान छात्र नेताओं को ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी, जो उनका संदेश मोहम्मद यूनुस तक पहुंचा सके। आलम के अनुसार, कदरुद्दीन शिशिर ने इस संपर्क की पहल की और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत कराने में मदद की।

आलम ने दावा किया कि शिशिर ढाका स्थित एएफपी कार्यालय में उनके पास बैठते थे और उन्होंने यह संवेदनशील काम गोपनीय तरीके से किया। उस समय सरकार का खुफिया तंत्र सक्रिय था और इस तरह के संपर्क की जानकारी सामने आने पर संबंधित पत्रकारों के लिए खतरा पैदा हो सकता था।

आलम के मुताबिक, यदि सरकार को इस बातचीत की भनक लग जाती, तो शिशिर और एएफपी की पूरी टीम को कथित गुप्त हिरासत केंद्र ‘आइनाघर’ पहुंचाया जा सकता था। बांग्लादेश में इस नाम का इस्तेमाल उन कथित हिरासत केंद्रों के लिए किया जाता रहा है, जहां हसीना शासन के दौरान राजनीतिक विरोधियों को गैरकानूनी तरीके से बंद रखने, प्रताड़ित करने और उनकी हत्या किए जाने के आरोप लगे थे।

आलम ने यह भी दावा किया कि शिशिर ने सरकार की कथित ज्यादतियों से जुड़े वीडियो साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए थे। बांग्लादेश संवाद संस्था के अनुसार, शेख हसीना के देश छोड़ने की खबर सबसे पहले देने के लिए शफीकुल आलम को जून 2025 में सोसाइटी ऑफ पब्लिशर्स इन एशिया (SOPA) पुरस्कार भी मिला था।

हसीना के देश छोड़ने से पहले यूनुस से संपर्क की कोशिश?

शफीकुल आलम के बयान के बाद सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि क्या मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपने की तैयारी शेख हसीना के सत्ता छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी। बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ छात्र आंदोलन से हुई थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन हसीना सरकार के खिलाफ व्यापक जनविरोध में बदल गया।

5 अगस्त 2024 को हिंसक प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। वह हेलीकॉप्टर और फिर विमान से भारत के हिंडन एयरबेस पहुंचीं। इसके अगले दिन, 6 अगस्त को छात्र आंदोलन के नेताओं ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव सार्वजनिक किया। इस घोषणा से जुड़े छात्र नेताओं में नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद भी शामिल थे, जिन्हें बाद में यूनुस सरकार में सलाहकार की जिम्मेदारी मिली।

इसके बाद 8 अगस्त 2024 को यूनुस पेरिस से ढाका पहुंचे और अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली। शफीकुल आलम के ताजा दावे के मुताबिक, छात्र नेताओं और यूनुस के बीच संपर्क की प्रक्रिया हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी।

हालांकि, इस संपर्क के दावे से यह साबित नहीं होता कि पूरा आंदोलन या सत्ता परिवर्तन पहले से तय किसी योजना के तहत हुआ था। फिलहाल यह आलम का बयान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए अतिरिक्त साक्ष्यों की जरूरत होगी।

आंदोलन की रणनीति पर यूनुस का पुराना बयान भी चर्चा में

इस घटनाक्रम के बीच सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में मोहम्मद यूनुस की ओर से दिया गया बयान भी चर्चा में आ गया है। उस कार्यक्रम में उन्होंने अपने विशेष सहायक महफूज आलम को पूरी क्रांति के पीछे का दिमाग बताया था।

जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन का उल्लेख करते हुए यूनुस ने कहा था कि यह अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं था, बल्कि इसे व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया था। उन्होंने यह भी बताया था कि आंदोलन का नेतृत्व इस तरह तैयार किया गया था कि किसी नेता की गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन जारी रह सके।

यूनुस के इस पुराने बयान और शफीकुल आलम के ताजा दावे को जोड़कर बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि और आंदोलन की रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन दोनों बयानों से अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सत्ता परिवर्तन के पीछे कोई गुप्त साजिश थी।

हसीना की बांग्लादेश वापसी की चर्चा के बीच नया दावा

शफीकुल आलम का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब शेख हसीना भारत में निर्वासन के दौरान बांग्लादेश लौटने की बात कह चुकी हैं। खबर के मुताबिक, 19 अक्टूबर को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की बात दोहराई थी। हसीना ने यह भी कहा था कि उन्हें गिरफ्तारी, प्रताड़ना या जान से मारे जाने का डर नहीं है।

इसी बीच, 28 अक्टूबर को ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के एक पूर्व अधिकारी का शव नदी में मिलने की खबर सामने आई। रिपोर्टों में उनका संबंध उस वीडियो से बताया गया, जिसमें कथित तौर पर हसीना को 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ते हुए दिखाया गया था।

मृतक की पहचान 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. एम. तहसीफ सौरी के रूप में बताई गई है। उन्हें अगस्त 2024 में ही सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उनके परिवार ने हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि, उनकी मौत की वजह और हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो से उनके कथित संबंध की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

यूनुस का कार्यकाल खत्म, तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार

मोहम्मद यूनुस ने 16 फरवरी 2026 को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार का पद छोड़ दिया था। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में नई सरकार का गठन हुआ।

यूनुस के कार्यकाल के दौरान हसीना विरोधी आंदोलन से जुड़े कई छात्र नेताओं को अंतरिम सरकार में जगह मिली थी। बाद में इनमें से कुछ नेताओं ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का गठन किया। इस पार्टी ने चुनाव में जमात गठबंधन के साथ मिलकर हिस्सा लिया।

शफीकुल आलम के ताजा दावे ने अगस्त 2024 के सत्ता परिवर्तन से जुड़े घटनाक्रम को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, छात्र नेताओं और यूनुस के बीच पहले संपर्क होने का दावा और पूरे आंदोलन को पूर्व नियोजित साजिश बताना दो अलग-अलग बातें हैं। इन दोनों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र जांच और पुष्ट साक्ष्यों की आवश्यकता होगी।

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