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बंगाल SIR: 37 लाख से ज्यादा अपील लंबित, 5 महीने में निपटे 1.26 लाख केस; मौजूदा रफ्तार से 12 साल लगने का अनुमान

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े मामलों की अपीलों का बड़ा बैकलॉग सामने आया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अपीलीय न्यायाधिकरणों ने अप्रैल से अब तक 1,26,194 अपीलों का निपटारा किया है, जबकि 37 लाख से ज्यादा मामले अभी लंबित हैं। आयोग के मुताबिक मौजूदा गति बनी रही तो सभी अपीलों के निपटारे में करीब 12 साल लग सकते हैं।

एक महीने में करीब 25 हजार मामलों का निपटारा

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 16 सितंबर तक 37,05,235 अपील लंबित थीं। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मौजूदा ढांचे और काम करने की रफ्तार को देखते हुए इतने बड़े बैकलॉग को निपटाने में लंबा समय लग सकता है। इससे अपीलों के जल्द निपटारे को लेकर न्यायाधिकरणों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत सामने आई है।

न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मौजूदा बुनियादी ढांचा और कर्मचारियों की संख्या इतनी बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे के लिए पर्याप्त नहीं है। आयोग ने अपीलीय न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों को घर से काम करने की सुविधा देने से भी मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने में मदद मिलने की बात कही गई है। यह जवाब टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन की ओर से अपीलों के निपटारे को लेकर दायर याचिका के संदर्भ में दिया गया है।

कांग्रेस ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर साधा निशाना

कांग्रेस ने 20 सितंबर को SIR के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इसे “शाह-इंस्टीगेटेड रिमूवल” बताते हुए संविधान पर हमला करार दिया। कांग्रेस का दावा है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्गों के मतदाता इससे disproportionately प्रभावित हुए हैं। ये कांग्रेस के आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और अपीलों के निपटारे से संबंधित अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है।

चुनाव आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों पर सुनवाई के लिए गठित न्यायाधिकरणों के सामने बड़ी संख्या में अपीलें आई हैं। आयोग ने लंबित मामलों को देखते हुए व्यवस्था को बढ़ाने की जरूरत बताई है, ताकि इन अपीलों का निपटारा तेजी से किया जा सके।

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