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ब्रिटिश दौर की परंपराओं पर बड़ा प्रहार, सेना की वर्दी और ग्रूमिंग नियमों में ऐतिहासिक बदलाव

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने औपनिवेशिक दौर की कई पुरानी परंपराओं को समाप्त करते हुए यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग नियमों में बड़े बदलाव लागू किए हैं। सेना द्वारा जारी 174 पन्नों के नए ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ मैनुअल में वर्दी, पहनावे, ग्रूमिंग और औपचारिक सैन्य परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। करीब आठ साल बाद जारी इस व्यापक दस्तावेज को भारतीय सैन्य पहचान को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सेना के अनुसार नए नियम देश की बदलती संप्रभु पहचान, भारतीय मूल्यों और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इसका उद्देश्य सेना की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखते हुए ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही कई पुरानी व्यवस्थाओं को समाप्त करना है।

भारतीय पहचान के अनुरूप तैयार हुआ नया मैनुअल

नए मैनुअल में स्पष्ट किया गया है कि सेना के ड्रेस कोड और परंपराओं को समकालीन भारतीय सोच के अनुरूप ढाला जा रहा है। इसके तहत ब्रिटिशकालीन शब्दावली और औपनिवेशिक प्रतीकों को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।

मैनुअल की प्रस्तावना में एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने कहा है कि यह संस्करण सेना की परंपराओं को संरक्षित रखते हुए ड्रेस नियमों को आधुनिक भारतीय दृष्टिकोण के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

फॉर्मल कार्यक्रमों में अब पहन सकेंगे बंडी जैकेट

नए नियमों के तहत पहली बार अधिकारियों को औपचारिक कार्यक्रमों में बंद गले वाली बंडी जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। यह जैकेट पूरी आस्तीन की शर्ट के ऊपर पहनी जा सकेगी। इसे सादे और संयमित रंगों में डिजाइन किया गया है तथा इसे विभिन्न स्वीकृत पैटर्न में पहना जा सकेगा।

महिला अधिकारियों के लिए भी बदले ड्रेस नियम

महिला अधिकारियों को अब औपचारिक अवसरों पर साड़ी, कुर्ता-सलवार और दुपट्टे के साथ टखनों तक सीधी पैंट पहनने की अनुमति होगी। वहीं स्लीवलेस कुर्ता, प्लाजो और सिगरेट पैंट जैसे परिधानों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।

सेना को मिला नया विंटर ड्रेस कोड

आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026 के तहत सभी रैंकों के लिए नई विंटर ड्रेस ‘3B’ भी लागू की गई है। इसमें अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट कैप को शामिल किया गया है। सेना का मानना है कि यह ड्रेस कार्यक्षमता और सुविधा दोनों को बेहतर बनाएगी।

पाउच बेल्ट हटाई गई, तलवार अब वैकल्पिक

औपचारिक सैन्य आयोजनों में पहनी जाने वाली मेस ड्रेस नंबर-5 और नंबर-6 से चमकदार पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है। हालांकि कुछ विशेष रेजिमेंटों और कोर के अधिकारियों को रेजिमेंटल आयोजनों में इसे पहनने की अनुमति बनी रहेगी।

इसके अलावा परेड के दौरान समीक्षा अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखने की अनिवार्यता को भी वैकल्पिक बना दिया गया है, जिसे सैन्य परंपराओं में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

ग्रूमिंग नियमों में भी सख्ती

नए मैनुअल में सैनिकों के व्यक्तिगत रखरखाव और अनुशासन संबंधी नियमों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। शरीर पर टैटू बनवाने और बॉडी पियर्सिंग पर पहले की तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। वर्दी के साथ किसी भी प्रकार का ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी। केवल धार्मिक अवसरों पर कलावा बांधने की सीमित छूट दी गई है।

सिख सैनिकों को छोड़कर अन्य किसी सैनिक को वर्दी में धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं होगी।

मूंछ, परफ्यूम और मेकअप को लेकर भी बने नियम

सेना ने मूंछों की अधिकतम लंबाई 12 सेंटीमीटर निर्धारित की है। ड्यूटी और वर्दी के दौरान डियोड्रेंट या परफ्यूम के उपयोग पर रोक रहेगी, जबकि आफ्टर-शेव लोशन का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

महिला सैनिकों और अधिकारियों के लिए लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया है। विवाहित महिला कर्मियों को सिंदूर लगाने की अनुमति होगी, लेकिन यह इस प्रकार लगाया जाना चाहिए कि बेरेट या कैप पहनने के बाद दिखाई न दे।

औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़ने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सेना के ये बदलाव केवल वर्दी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सैन्य संस्कृति को भारतीय पहचान के अधिक करीब लाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। नए नियम सेना की पेशेवर छवि, अनुशासन और आधुनिकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं।

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