
पटना: फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के हितों पर केंद्र सरकार ने बड़ा भरोसा दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा को पत्र लिखकर कहा है कि फरक्का यानी गंगा जल संधि से जुड़े किसी भी फैसले में बिहार की पेयजल और औद्योगिक जल जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। संजय झा ने इस आश्वासन के लिए विदेश मंत्री का आभार जताया है।
राज्यसभा में संजय झा ने उठाया था मुद्दा
संजय झा ने 6 अगस्त को राज्यसभा में विशेष उल्लेख के दौरान बिहार के जल हितों से जुड़ा यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने फरक्का जल संधि का नवीनीकरण नहीं करने और बिहार के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि गंगा जल संधि को लेकर संजय झा की चिंताओं को सरकार समझती है।
जयशंकर ने अपने पत्र में बताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 2023 और 2024 में संबंधित पक्षों की भागीदारी के साथ अंतर-मंत्रालयी स्तर पर चर्चा की थी। इन बैठकों का उद्देश्य संधि के क्रियान्वयन और भविष्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की व्यापक समीक्षा करना था।
केंद्र के साथ बैठकों में बिहार ने रखा था अपना पक्ष
बिहार सरकार के अधिकृत प्रतिनिधि ने 22 अगस्त 2023, 30 अक्टूबर 2023, 15 मार्च 2024 और 31 मई 2024 को केंद्र के साथ हुई बैठकों में हिस्सा लिया था। इन चर्चाओं में राज्य की जरूरतों और जल संबंधी हितों पर विचार किया गया था। विदेश मंत्री ने कहा कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार उचित फैसला लेगी।
साल 2023 में संजय झा बिहार के जल संसाधन मंत्री थे। उस दौरान उन्होंने फरक्का बैराज से बिहार को होने वाले नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
संजय झा ने विदेश मंत्री का जताया आभार
संजय झा ने एस जयशंकर के पत्र को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए उनके आश्वासन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधियों ने उनके जल संसाधन मंत्री रहने के दौरान केंद्र की बैठकों में हिस्सा लिया था।
उन्होंने बताया कि 22 अगस्त 2023 और 30 अक्टूबर 2023 के अलावा 15 मार्च 2024 और 31 मई 2024 को हुई चर्चाओं में बिहार की पेयजल, कृषि और औद्योगिक जल जरूरतों पर विस्तार से विचार किया गया था। संजय झा ने कहा कि बिहार के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लिए जाने के स्पष्ट आश्वासन के लिए राज्य के लोग केंद्र सरकार के आभारी हैं।
दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है फरक्का संधि की अवधि
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे को लेकर फरक्का जल संधि 1996 में हुई थी। यह समझौता 30 वर्ष के लिए किया गया था और इसकी अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।
बिहार लंबे समय से फरक्का बैराज के प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखता रहा है। राज्य का तर्क है कि बैराज के कारण गंगा नदी में बड़ी मात्रा में गाद जमा हुई है, जिससे नदी का तल ऊंचा हुआ है। इसके चलते मानसून के दौरान बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ जाता है।
बिहार का यह भी कहना है कि गर्मियों के दौरान बैराज के प्रभाव से गंगा के जल स्तर पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिसके कारण राज्य के कई क्षेत्रों में पानी की कमी की स्थिति पैदा होती है।



