झारखण्ड

झारखंड की बड़ी योजनाओं पर CAG का बड़ा खुलासा, PM आवास से मनरेगा तक मिलीं गंभीर गड़बड़ियां

रांची: झारखंड में ग्रामीण विकास से जुड़ी तीन प्रमुख केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। मंगलवार को विधानसभा में पेश रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, जल जीवन मिशन और मनरेगा की समीक्षा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, योजनाओं के लक्ष्य तय करने, धनराशि के इस्तेमाल और काम पूरा करने में कई स्तर पर खामियां मिली हैं।

पीएम आवास योजना में 6.32 लाख पात्र परिवार छूटे

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में पात्र परिवारों की पहचान और लक्ष्य निर्धारण में गड़बड़ी के चलते 6.32 लाख से अधिक पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए। नवंबर 2022 तक राज्य में 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की गई थी, लेकिन प्राथमिकता सूची की खामियों और लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने में हुई देरी के कारण केंद्र से केवल 16.02 लाख मकानों का ही लक्ष्य मिल सका।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार निर्धारित लक्ष्यों का प्रभावी इस्तेमाल नहीं कर सकी। लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने में करीब दो वर्ष की देरी भी हुई।

15.62 लाख मकान बने, वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल

कैग के मुताबिक, वर्ष 2016 से 2024 के बीच झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 15,92,124 मकानों को मंजूरी दी गई। इनमें से जनवरी 2025 तक 15,62,249 मकानों का निर्माण पूरा हो चुका था।

योजना के वित्तीय प्रबंधन को कैग ने पर्याप्त नहीं माना है। राज्य में उपलब्ध कुल 20,199.98 करोड़ रुपये की राशि में से 14,113 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2019 से 2024 के बीच धनराशि के इस्तेमाल का स्तर 55 से 83 प्रतिशत के बीच रहा।

जल जीवन मिशन में हजारों योजनाएं अधूरी

जल जीवन मिशन की समीक्षा में भी योजना के क्रियान्वयन को लेकर कई खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने 24,360 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 98,067 योजनाओं को मंजूरी दी थी। इनमें से 97,535 योजनाओं को 24,665.29 करोड़ रुपये की सहमत लागत पर लागू करने के लिए लिया गया।

हालांकि, दिसंबर 2024 तक इनमें से सिर्फ 27,249 योजनाएं ही पूरी हो पाईं। मार्च 2025 तक झारखंड के 62,53,471 ग्रामीण परिवारों में से 34,31,115 परिवारों यानी करीब 55 प्रतिशत को ही कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन मिल सके थे। यह राष्ट्रीय स्तर के 80 प्रतिशत कवरेज से काफी कम था।

मनरेगा में मजदूरी बकाया, आधे काम अधूरे

मनरेगा को लेकर कैग की रिपोर्ट में प्रमाणित वित्तीय खातों और नरेगासॉफ्ट पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में अंतर पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच अकुशल श्रमिकों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया थी।

समीक्षाधीन अवधि में काम के लिए प्रस्तावित कुल 1,02,68,484 कार्यों में से मार्च 2024 तक केवल 27,96,044 कार्य पूरे हुए। यानी करीब 27 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका था। वहीं 50,21,492 कार्य यानी करीब 49 प्रतिशत काम अधूरे पड़े थे। इन अधूरे और पूरे किए गए कार्यों पर कुल 2,633 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

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