चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की नित्य योगशाला बनी स्वस्थ समाज निर्माण का सशक्त माध्यम
भुजंगासन, शलभासन एवं धनुरासन कमर दर्द, कब्ज तथा पाचन तंत्र संबंधी समस्याओं के निवारण में उपयोगी सिद्ध
Meerut CCSU News: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के योग विज्ञान विभाग द्वारा संचालित नित्य योग शिविर के नवें दिन योग साधकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से विश्वविद्यालय सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए स्वस्थ एवं जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में योग विज्ञान विभाग द्वारा संचालित नित्य योगशाला प्रतिदिन हजारों लोगों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर रही है।
योग भारतीय संस्कृति की अनुपम एवं अमूल्य धरोहर
योग विज्ञान विभाग के समन्वयक प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अनुपम एवं अमूल्य धरोहर है। यह केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक जीवन को भी संतुलित और समृद्ध बनाता है।
योग एक सरल, सहज और प्रभावी समाधान
वर्तमान समय में जब जीवनशैली जनित रोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तब योग एक सरल, सहज और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आया है। उन्होंने बताया कि सामान्यतः अनेक संस्थाएं केवल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के अवसर पर योग कार्यक्रम आयोजित करती हैं, किंतु चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय योग को केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रखता।
नियमित रूप से नित्य योगशाला का संचालन
विश्वविद्यालय वर्ष के सभी 365 दिनों में, चाहे भीषण गर्मी हो, कड़ाके की सर्दी हो अथवा वर्षा ऋतु, प्रातः 6:00 बजे से 7:00 बजे तक नियमित रूप से नित्य योगशाला का संचालन करता है। यह योगशाला समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए निःशुल्क उपलब्ध है और बड़ी संख्या में लोग यहां आकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
योग मैट लेकर योग करने के लिए आमंत्रित करते
योग साधकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नित्य योगशाला की शुरुआत अत्यंत सीमित स्तर पर हुई थी। उस समय योग विज्ञान विभाग के योगाचार्य अमरपाल स्वयं अपने स्कूटर से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचते थे और अपने कंधे पर योग मैट लेकर लोगों को योग करने के लिए विनम्रतापूर्वक आमंत्रित करते थे। प्रारंभिक दिनों में केवल दो से चार लोग ही योगाभ्यास के लिए आते थे। लेकिन योग के सकारात्मक परिणामों और योगाचार्य अमरपाल के अथक प्रयासों के कारण धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ती चली गई।
साधकों की संख्या इतनी बढ़ी कि प्रांगण भी छोटा पड़ गया
इसके पश्चात विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के निर्देशानुसार नित्य योगशाला का संचालन विश्वविद्यालय के पुस्तकालय प्रांगण में प्रारंभ किया गया। समय के साथ साधकों की संख्या इतनी अधिक बढ़ी कि पुस्तकालय प्रांगण भी छोटा पड़ गया। वर्तमान में योग विज्ञान विभाग के विशाल परिसर में नित्य योगशाला संचालित की जा रही है, जहां प्रतिदिन हजारों योग साधक योगाभ्यास कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। विभाग का मूल संदेश “करो नित्य योग, रहो निरोग” समाज में स्वास्थ्य जागरूकता का प्रभावी माध्यम बन रहा है। प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि दिसंबर माह की कड़ाके की ठंड में भी सैकड़ों साधक नियमित रूप से योगाभ्यास के लिए उपस्थित रहते हैं।
जीवनशैली संबंधी रोगों में उल्लेखनीय लाभ प्राप्त किया
यह योग के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था और विश्वास का प्रमाण है। योगाभ्यास के माध्यम से अनेक लोगों ने मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, मोटापा, कमर दर्द एवं अन्य जीवनशैली संबंधी रोगों में उल्लेखनीय लाभ प्राप्त किया है। कार्यक्रम में योगाचार्य अमरपाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ योगाभ्यास का शुभारंभ कराया। इसके उपरांत सूक्ष्म व्यायाम, सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, वृक्षासन, भागीरथ आसन, नटराज आसन, मंडूकासन, गोमुखासन, भुजंगासन, शलभासन एवं धनुरासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया।
मंडूकासन मधुमेह के नियंत्रण एवं उपचार में अत्यंत लाभकारी
योगाचार्य अमरपाल ने बताया कि मंडूकासन मधुमेह के नियंत्रण एवं उपचार में अत्यंत लाभकारी माना जाता है। वहीं गोमुखासन के नियमित अभ्यास से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर तथा कंधों और गर्दन से संबंधित अनेक विकारों में राहत मिलती है। भुजंगासन, शलभासन एवं धनुरासन कमर दर्द, कब्ज तथा पाचन तंत्र संबंधी समस्याओं के निवारण में उपयोगी सिद्ध होते हैं।
विभिन्न प्राणायामों का अभ्यास भी कराया गया
योगाभ्यास के पश्चात विभिन्न प्राणायामों का अभ्यास भी कराया गया। योगाचार्य ने बताया कि प्राणायाम हमारे प्राणों का विस्तार कर शरीर की जीवनी शक्ति को बढ़ाता है। विशेष रूप से नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर में स्थित ऊर्जा मार्गों को संतुलित एवं शुद्ध करने में सहायक होता है, जिससे मानसिक शांति, एकाग्रता एवं सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। इस अवसर पर डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. विवेक कुमार त्यागी, अभिषेक कुमार, पुष्पेंद्र यादव, नंदिनी सिंह सहित बड़ी संख्या में योग साधक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



