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ट्रंप के आदेश से बदल सकती है बच्चों की वैक्सीन व्यवस्था, MMR टीके को लेकर बड़ा बदलाव

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश के बाद बच्चों के टीकाकरण की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने की संभावना है। आदेश में खसरा, गलसुआ और रूबेला से बचाव करने वाले एमएमआर जैसे संयुक्त टीकों को अलग-अलग टीकों में बांटने और जहां संभव हो, टीकों के बीच ज्यादा अंतर रखने की योजना तैयार करने को कहा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर टीकाकरण की प्रक्रिया के साथ दवा कंपनियों, डॉक्टरों और माता-पिता पर भी पड़ सकता है। बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका में इन बीमारियों के अलग-अलग टीकों का दशकों से बड़े स्तर पर इस्तेमाल नहीं हुआ है।

90 दिनों में तैयार करनी होगी बदलाव की योजना

ट्रंप के आदेश के तहत संघीय अधिकारियों को 90 दिनों के भीतर एमएमआर टीके को अलग-अलग करने और अन्य टीकों के बीच अंतर बढ़ाने की योजना तैयार करने को कहा गया है। मौजूदा व्यवस्था में एमएमआर टीका खसरा, गलसुआ और रूबेला तीनों बीमारियों से एक साथ बचाव करता है। अमेरिका में इस तीन-इन-वन व्यवस्था का इस्तेमाल 1970 के दशक से मानक रूप में किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार संयुक्त टीकों के इस्तेमाल से बच्चों के स्कूल जाने की उम्र तक संक्रामक बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित होने की संभावना बढ़ती है।

दशकों पुराने अलग टीकों का उत्पादन फिर शुरू करना होगा

अमेरिका में फिलहाल खसरा, गलसुआ और रूबेला के अलग-अलग टीके उपलब्ध नहीं हैं। इन तीनों बीमारियों के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मंजूर टीके संयुक्त रूप में उपलब्ध हैं। यदि एमएमआर को अलग-अलग टीकों में बांटा जाता है तो दवा कंपनियों को पुराने व्यक्तिगत टीकों का उत्पादन दोबारा शुरू करना पड़ सकता है।

इसके लिए नए अध्ययन, उत्पादन सुविधाओं और संघीय मंजूरी की जरूरत हो सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि नई वैक्सीन फैक्टरी तैयार करने और उसे मंजूरी मिलने में करीब पांच साल तक का समय लग सकता है। इसके अलावा नए उत्पादन संयंत्र स्थापित करने पर कंपनियों को करोड़ों डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।

अलग-अलग टीकों की मंजूरी के लिए बड़े अध्ययन की जरूरत

व्यक्तिगत टीकों को विकसित करने के बाद उन्हें अलग-अलग मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। पूर्व एफडीए वैक्सीन प्रमुख जेसी गुडमैन के मुताबिक कंपनियों को बड़े अध्ययनों के जरिए यह साबित करना पड़ सकता है कि नए व्यक्तिगत टीके बच्चों में मौजूदा टीकों के समान प्रतिरोधक क्षमता पैदा करते हैं।

इसके साथ ही नई उत्पादन प्रक्रिया और संयंत्र की सुरक्षा को भी साबित करना होगा। अमेरिका में कई दशकों से व्यक्तिगत खसरा टीके का बड़े स्तर पर उत्पादन नहीं हुआ है। इसलिए इस बदलाव की प्रक्रिया सामान्य नियामकीय बदलाव की तुलना में अधिक जटिल हो सकती है।

छह बार टीकाकरण के लिए जाना पड़ सकता है

एमएमआर टीका फिलहाल दो खुराक में दिया जाता है। पहली खुराक आमतौर पर बच्चे के एक साल की उम्र में और दूसरी चार साल की उम्र के बाद दी जाती है। अगर प्रत्येक खुराक को खसरा, गलसुआ और रूबेला के तीन अलग-अलग टीकों में बांट दिया जाता है तो बच्चों को छह अलग-अलग टीकाकरण यात्राएं करनी पड़ सकती हैं।

इसके अलावा दूसरे संक्रामक रोगों के टीकों के बीच भी अंतर बढ़ाया गया तो डॉक्टरों के पास जाने की संख्या और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों को आशंका है कि अधिक समय और खर्च के कारण कुछ माता-पिता बच्चों के टीकाकरण की अपॉइंटमेंट छोड़ सकते हैं।

टीकाकरण दर घटने की आशंका, प्रशासन का दावा अलग

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि टीकाकरण की प्रक्रिया जितनी लंबी और महंगी होगी, उसे पूरा कराना उतना ही मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञ एना डर्बिन का कहना है कि संयुक्त टीकों को अलग करने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इससे व्यवस्था कम सुविधाजनक तथा अधिक महंगी हो सकती है।

हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव से माता-पिता को बच्चों के टीकाकरण के समय और खुराकों के बीच अंतर को लेकर अधिक विकल्प मिलेंगे। प्रशासन के मुताबिक इससे तीनों बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण दर बढ़ सकती है।

दवा कंपनियों को अलग टीके बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता आदेश

ट्रंप के आदेश के बावजूद दवा कंपनियों को नए व्यक्तिगत टीके बनाने और उनकी मंजूरी के लिए आवेदन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कंपनियों के लिए अलग-अलग टीकों का उत्पादन कारोबारी तौर पर भी आकर्षक नहीं हो सकता, क्योंकि वे पहले से संयुक्त टीकों की बिक्री कर रही हैं।

मर्क और जीएसके ने अपने मौजूदा टीकों की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर भरोसा जताया है। मर्क ने कहा है कि अभी तक ऐसा कोई प्रकाशित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जिससे यह पता चले कि एमएमआर टीके को तीन अलग-अलग टीकों में बांटने से कोई फायदा होगा।

आदेश के बाद भी तुरंत नहीं बदलेगी टीकाकरण व्यवस्था

ट्रंप के आदेश के बावजूद बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था में बदलाव तुरंत लागू होना तय नहीं है। पहले संघीय अधिकारियों को योजनाएं तैयार करनी होंगी। इसके बाद अलग-अलग टीकों के विकास, उत्पादन और मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

विशेषज्ञों ने आदेश की कानूनी और व्यावहारिक प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए हैं। व्हाइट हाउस और एफडीए दवा कंपनियों को सीधे नए टीके विकसित करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के आदेश और वास्तविक टीकाकरण व्यवस्था में बदलाव के बीच लंबी प्रक्रिया हो सकती है। इस योजना को लेकर वैज्ञानिक, कारोबारी और कानूनी स्तर पर बहस आगे भी तेज होने की संभावना है।

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