चीन का अनोखा प्रयोग! 20 मंजिला एयर प्यूरीफायर टॉवर से हवा साफ करने की कोशिश, प्रदूषण में आई कमी के दावे

नई दिल्ली: चीन ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक अत्याधुनिक और महत्वाकांक्षी तकनीकी प्रयोग शुरू किया है। उत्तरी चीन के शान्शी प्रांत के शिआन शहर में लगभग 100 मीटर से अधिक ऊंचा एयर प्यूरीफायर टॉवर बनाया गया है, जिसे करीब 20 मंजिला इमारत के बराबर माना जा रहा है। इस परियोजना को चीनी विज्ञान अकादमी के इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ एनवायरनमेंट द्वारा विकसित किया गया है।
यह टॉवर शहर की हवा को साफ करने की दिशा में एक बड़े प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है और इसके शुरुआती नतीजे कुछ हद तक सकारात्मक बताए जा रहे हैं।
रोजाना करोड़ों क्यूबिक मीटर हवा साफ करने की क्षमता का दावा
जानकारी के अनुसार यह विशाल टॉवर प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ घन मीटर तक स्वच्छ हवा तैयार करने की क्षमता रखता है। संचालन के बाद आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार के शुरुआती संकेत भी मिले हैं।
ग्रीनहाउस सिस्टम से चलता है पूरा तंत्र
यह एयर प्यूरीफायर सामान्य बिजली आधारित सिस्टम की तरह नहीं है। इसके चारों ओर बड़े कांच से बने ग्रीनहाउस संरचनाएं बनाई गई हैं, जहां प्रदूषित हवा प्रवेश करती है।
सूर्य की गर्मी से हवा गर्म होकर ऊपर उठती है और टॉवर के भीतर लगे फिल्टर सिस्टम से गुजरती है। यह फिल्टर धूल, धुआं और हानिकारक कणों को हटाकर हवा को शुद्ध करता है। सौर ऊर्जा पर आधारित होने के कारण दिन के समय इसमें बेहद कम अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत पड़ती है।
प्रदूषण में 15 प्रतिशत तक कमी का दावा
इस परियोजना के तहत टॉवर के आसपास लगभग 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 12 से अधिक मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए हैं। इन स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, भारी प्रदूषण के दिनों में पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों में औसतन 15 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
कई मौकों पर गंभीर स्मॉग को मध्यम स्तर तक लाने में भी इस तकनीक को प्रभावी बताया गया है। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये शुरुआती परिणाम हैं और अंतिम निष्कर्ष दीर्घकालिक अध्ययन के बाद ही निकाले जाएंगे।
भविष्य में और बड़े टॉवर की योजना
इस प्रयोग को चीन के लंबे समय से चल रहे स्मॉग संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैज्ञानिक अब इससे भी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें लगभग 500 मीटर ऊंचा टॉवर और विस्तृत ग्रीनहाउस नेटवर्क शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकें छोटे शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने में मददगार हो सकती हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए उत्सर्जन में कटौती और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना ही सबसे जरूरी कदम है।



