
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी से जुड़े कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। सोमवार को राज्य की CID टीम सीधे TMC सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास परिसर तक पहुंच गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए केंद्रीय बलों की तैनाती भी की गई थी। सूत्रों के अनुसार CID अधिकारी परिसर के भीतर पहुंचकर जांच-पड़ताल में जुट गए, जबकि ममता बनर्जी इस समय नई दिल्ली में हैं और रविवार को I.N.D.I.A. गठबंधन की बैठक में शामिल हुई थीं।
ममता आवास से सटे TMC दफ्तर में दस्तावेजों की जांच
CID की एक बड़ी टीम ममता बनर्जी के आवास से सटे 30बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित TMC पार्टी कार्यालय पहुंची, जहां अधिकारियों ने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की। इसी दौरान एक अन्य टीम कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय भी पहुंची और वहां से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। पूरा मामला कथित तौर पर पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर जालसाजी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी जांच के लिए राज्य CID ने 5 सदस्यीय SIT का गठन किया है। जांच की निगरानी पश्चिम बंगाल पुलिस के DIG स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।
विधायकों के बयानों से बढ़ा शक, कई ने हस्ताक्षर से किया इनकार
जांच के दौरान अब तक CID ने 13 TMC विधायकों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें से 3 विधायकों ने साफ तौर पर कहा है कि 6 मई की बैठक के प्रस्ताव रजिस्टर में मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। वहीं कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र के एक विधायक ने दावा किया कि वह 6 मई को कोलकाता में हुई उस बैठक में मौजूद ही नहीं थे। इसी जांच के तहत CID ने अभिषेक बनर्जी से पार्टी के मूल प्रस्ताव दस्तावेज और मीटिंग रेजोल्यूशन बुक पेश करने को कहा था, जिस पर उनके कानूनी सलाहकार के माध्यम से औपचारिक जवाब भेजा गया है।
6 मई की बैठक और 70 विधायकों की मौजूदगी का दावा
जानकारी के मुताबिक 9 मई को अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को बताया था कि पार्टी विधायक दल की बैठक में पदाधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 18 मई को विधानसभा के प्रधान सचिव ने बैठक की कार्यवाही, प्रस्ताव की प्रति और विधायकों के हस्ताक्षर उपलब्ध कराने को कहा। 20 मई को अभिषेक बनर्जी की ओर से मीटिंग रेजोल्यूशन बुक जमा कराई गई, जिसमें दावा किया गया कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक मौजूद थे।
दो विधायकों की शिकायत से गहराया विवाद
27 मई को TMC के दो विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की कि 6 मई की बैठक में विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कोई वैध प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। दोनों विधायकों ने आरोप लगाया कि उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर 6 मई को नहीं, बल्कि 19 मई को किए थे। साथ ही यह भी दावा किया गया कि दस्तावेज बाद में तैयार किए गए और कई हस्ताक्षर संदिग्ध हैं, जिनमें से कई कैपिटल लेटर्स में हैं। इन आरोपों के बाद पार्टी ने दोनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया।
पुलिस केस के बाद CID के हाथों में जांच
विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत पर 27 मई को हेयर स्ट्रीट थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया था। अगले ही दिन 28 मई को जांच CID को सौंप दी गई। अब CID दस्तावेजों की सत्यता, हस्ताक्षरों की जांच, बैठक के रिकॉर्ड और सभी संबंधित पक्षों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही है। सोमवार को ममता बनर्जी के आवास परिसर और TMC कार्यालयों में पहुंची टीम इसी जांच का अहम हिस्सा मानी जा रही है।



