मध्य प्रदेश

राज्यसभा की रेस में बीजेपी के दिग्गजों की टक्कर तेज, CM मोहन यादव के दिल्ली दौरे से बढ़ी सियासी हलचल

भोपाल : मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर मंथन अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया दिल्ली दौरे के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें और तेज हो गई हैं कि पार्टी जल्द ही अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश संगठन की ओर से संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया गया है और अब अंतिम मुहर दिल्ली में लगने की संभावना है। इस बार पार्टी केवल संगठनात्मक संतुलन ही नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को भी ध्यान में रखकर फैसला ले रही है।

कैलाश विजयवर्गीय सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल

राज्यसभा की रेस में सबसे चर्चित नाम कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बताया जा रहा है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विजयवर्गीय राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक भी हैं।

यदि उनका नाम आगे बढ़ता है तो इसे मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा रणनीतिक संकेत माना जाएगा।

नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी भी मजबूत

पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है। संगठन और केंद्रीय नेतृत्व दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी भूमिका और संसदीय अनुभव उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग बनाता है।

संघ और संगठन से जुड़े नाम भी चर्चा में

सूत्रों के अनुसार इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी अहम रहने वाली है। इसी कारण अभय महाजन और महेश शर्मा जैसे नामों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। पार्टी संगठनात्मक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दे रही है।

महिला और OBC समीकरण पर भी फोकस

राज्यसभा की सूची में महिला और ओबीसी वर्ग से जुड़े नाम भी चर्चा में हैं। पूर्व मंत्री रंजना बघेल, अरविंद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह और जीएस डामोर जैसे नेताओं के नाम संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। पार्टी सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अंतिम सूची में कुछ नए और चौंकाने वाले नाम भी शामिल कर सकती है।

दिल्ली में होगा अंतिम फैसला

पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही सभी राज्यों के राज्यसभा उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय ले सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली दौरा भी इसी प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी अनुभव, संगठन या सामाजिक संतुलन में किसे प्राथमिकता देती है।

फिलहाल संकेत यही हैं कि राज्यसभा की इन सीटों को लेकर बीजेपी के भीतर मुकाबला बेहद रोचक हो गया है और अंतिम सूची आने तक सियासी चर्चाएं तेज बनी रहेंगी।

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