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शिमला में पल्स पोलियो अभियान को शानदार शुरुआत, पहले ही दिन 50 हजार से ज्यादा बच्चों ने पी जिंदगी की दो बूंद

शिमला: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के पहले दिन उल्लेखनीय सफलता दर्ज की गई। रविवार को जिले भर में पांच वर्ष से कम आयु के 50,454 बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाई गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान को सफल बनाने के लिए पूरे जिले में 704 पल्स पोलियो बूथ स्थापित किए गए थे, जहां बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंचे।

स्वास्थ्य विभाग से लेकर स्वयंसेवी संगठनों तक सभी ने निभाई भूमिका

अभियान में स्वास्थ्य विभाग के साथ विभिन्न सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। बच्चों तक पोलियो की खुराक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई थीं, जिससे पहले दिन ही लक्ष्य के अनुरूप बेहतर परिणाम देखने को मिले।

पर्यटकों के बच्चों के लिए विशेष बूथ की व्यवस्था

पर्यटकों के बच्चों को भी अभियान से जोड़ने के लिए शोघी पुलिस बैरियर पर विशेष ओपीवी बूथ स्थापित किया गया था। यहां पर्यटकों को लेकर आने-जाने वाली बसों और अन्य वाहनों को रोककर बच्चों को पोलियो की खुराक दी गई।

इस दौरान स्थानीय कलाकारों ने लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने काफी सराहा।

माशोबरा ब्लॉक में सबसे अधिक बच्चों को पिलाई गई खुराक

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने बताया कि चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मियों, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों, स्वयंसेवकों, पुलिस कर्मियों तथा स्थानीय निकायों के सामूहिक प्रयासों से अभियान सफल रहा।

उन्होंने बताया कि जिले में सबसे अधिक 8,166 बच्चों को माशोबरा स्वास्थ्य ब्लॉक में पोलियो रोधी खुराक पिलाई गई। इसके अलावा नेरवा में 7,771, शिमला शहरी क्षेत्र में 6,886, कोटखाई में 5,426, मटियाना में 5,166, रामपुर में 5,014, टिकर में 3,773, चिड़गांव में 3,130, कुमारसैन में 2,065, सुन्नी में 1,928 और नानखड़ी में 1,129 बच्चों को दवा दी गई।

घर-घर पहुंचेंगी स्वास्थ्य टीमें, 30 जून तक चलेगा अभियान

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि अभियान 29 और 30 जून को भी जारी रहेगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो रोधी खुराक देंगी जो पहले दिन किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और सुनिश्चित करें कि पांच वर्ष से कम आयु का कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे, ताकि देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने का लक्ष्य कायम रखा जा सके।

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