2500 रुपये की कमाई से विधानसभा तक का सफर: घरों में झाड़ू-पोछा करने वाली कलिता माझी बनीं विधायक, औसग्राम सीट से दर्ज की बड़ी जीत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सियासत की परिभाषा ही बदल दी है। भारतीय जनता पार्टी ने 206 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत से काफी आगे का आंकड़ा हासिल किया है, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा एक साधारण पृष्ठभूमि से आईं 37 वर्षीय कलिता माझी की हो रही है, जिन्होंने घरों में काम करने से लेकर विधानसभा तक का सफर तय कर लिया है।
औसग्राम सीट से बड़ी जीत, टीएमसी उम्मीदवार को हराया
कलिता माझी ने पश्चिम बंगाल की औसग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी श्याम प्रसन्न लोहार को 12 हजार से अधिक वोटों से हराकर जीत हासिल की। उन्हें कुल 1 लाख 7 हजार 692 वोट मिले। इस सीट पर लेफ्ट के चंचल कुमार माझी तीसरे स्थान पर रहे, जबकि तापस बराल चौथे स्थान पर रहे।
2500 रुपये महीने की आय से चुनावी मैदान तक
गुसकारा क्षेत्र की रहने वाली कलिता माझी चुनाव से पहले चार घरों में घरेलू काम करती थीं और उनकी मासिक आय लगभग 2500 रुपये थी। आर्थिक रूप से बेहद साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए भाजपा ने उन्हें 2021 में हार के बाद भी दोबारा टिकट दिया।
काम और प्रचार दोनों साथ-साथ संभाला
कलिता माझी पात्रा परिवार के घर में लंबे समय से काम करती रही हैं। परिवार के मुताबिक वह पिछले 20 सालों से उनके साथ जुड़ी हुई हैं और घर की सदस्य जैसी हैं। वह सुबह 7 बजे काम पर पहुंचती थीं और कुछ देर बाद चुनाव प्रचार के लिए निकल जाती थीं। परिवार ने बताया कि चुनाव के दौरान उनके जाने से घर के कामों में परेशानी भी हुई, जिसके बाद उन्होंने उन्हें पूरी तरह प्रचार पर ध्यान देने के लिए कहा।
‘सुबह 5 बजे से शुरू होती थी दिनचर्या’
अप्रैल में एक चैनल से बातचीत में कलिता माझी ने बताया था कि जब उनका नाम उम्मीदवार के रूप में घोषित हुआ, तब वह दो घरों में काम कर रही थीं और लगभग 4500 रुपये महीना कमा रही थीं। वह सुबह 5 बजे उठकर काम शुरू कर देती थीं और उनकी सास घरेलू कामों में मदद करती थीं ताकि वह चुनावी जिम्मेदारी निभा सकें।
परिवार और सहयोगियों का मिला साथ
कलिता ने बताया कि उनके बेटे पार्थ ने चुनाव प्रचार में काफी मदद की। साथ ही उनके चुनाव एजेंट चंद्रनाथ बंद्योपाध्याय ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नियोक्ताओं ने उन्हें भरोसा दिया है कि चुनाव के कारण काम से अनुपस्थित रहने पर भी उनका वेतन दिया जाएगा।
राजनीतिक जुड़ाव का पुराना इतिहास
कलिता माझी ने बताया कि उनके जीजा कार्तिक बाग 2006 में औसग्राम सीट से सीपीएम के विधायक रह चुके हैं, हालांकि वर्तमान में परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं है।
एक आम महिला की असाधारण राजनीतिक यात्रा
घर के कामों से शुरू हुआ कलिता माझी का सफर अब पश्चिम बंगाल विधानसभा तक पहुंच गया है। उनकी जीत ने यह संदेश दिया है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग भी राजनीतिक मंच पर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।



