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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में नया खुलासा: SBI शाखा पहुंची पुलिस, बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों का फोकस बैंकिंग व्यवस्था और नकदी गणना प्रक्रिया पर भी पहुंच गया है। इसी कड़ी में सोमवार को पुलिस टीम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की अयोध्या शाखा पहुंची और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा बैंक कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू की।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चढ़ावे की नकदी की गणना और जमा प्रक्रिया के दौरान कहीं किसी स्तर पर कोई अनियमितता तो नहीं हुई। साथ ही गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है।

दो दर्जन से अधिक बैंक कर्मचारियों से पूछताछ

सूत्रों के मुताबिक विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस अब तक बैंक से जुड़े दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि शुरुआती जांच में किसी बैंक कर्मचारी की प्रत्यक्ष संलिप्तता के स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आए हैं, लेकिन जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

अधिकारियों का मानना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए नकदी गणना, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच जरूरी है।

राम मंदिर ट्रस्ट बड़ा बैंकिंग ग्राहक

जांच के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट और बैंकों के बीच वित्तीय संबंधों को भी खंगाला जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2021 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की लगभग 3,500 करोड़ रुपये की राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जमा थी।

बताया जा रहा है कि वर्तमान में भी एसबीआई के पास ट्रस्ट की करीब 1,000 करोड़ रुपये की जमा राशि है। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा में लगभग 500 करोड़ रुपये और पंजाब नेशनल बैंक में करीब 400 करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है।

नियुक्ति प्रक्रिया भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसियां उन कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही हैं, जो चढ़ावे की गणना और नकदी प्रबंधन से जुड़े थे। सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपियों की नियुक्ति कथित तौर पर ट्रस्ट की सिफारिश पर हुई थी।

बताया जा रहा है कि समझौता होने के बाद कर्मचारियों का वेतन एक आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से दिया जाने लगा था। अब जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि नियुक्तियों और जिम्मेदारियों के निर्धारण की प्रक्रिया किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुई थी।

महाकुंभ के दौरान बदला गया था गणना स्थल

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि प्रयागराज महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं और चढ़ावे की संख्या में भारी वृद्धि को देखते हुए नकदी गणना की व्यवस्था बदली गई थी।

सूत्रों के अनुसार, पहले चढ़ावे की गिनती तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र में होती थी, लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों से इसे पुलिस चौकी के पास बने एक विशेष कक्ष में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी दौरान गणना कार्य में लगे कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई थी।

कैसे होती थी नकदी की गणना?

जानकारी के अनुसार, गणना प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती थी। सबसे पहले आउटसोर्स कर्मचारी मुड़े-तुड़े नोटों को व्यवस्थित करते थे। इसके बाद नोटों की गड्डियां तैयार कर उन्हें बांधा जाता था।

फिर बैंक के स्थायी कर्मचारी मशीनों की सहायता से नोटों की गणना करते थे। गिनती पूरी होने के बाद स्लिप लगाई जाती थी और ट्रस्ट तथा बैंक प्रतिनिधियों के संयुक्त हस्ताक्षर के बाद राशि बैंक में जमा कराई जाती थी।

अब सबसे बड़ा सवाल- सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई?

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि नकदी कथित रूप से बाहर निकाली गई तो सुरक्षा और निगरानी तंत्र इसे पकड़ने में क्यों विफल रहा।

सूत्रों के अनुसार, गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी का नियंत्रण ट्रस्ट के पास था। वहीं प्रवेश और निकास के दौरान तलाशी की व्यवस्था भी मौजूद थी। इसके बावजूद यदि चोरी हुई, तो वह किस स्तर पर हुई और निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई, इसकी गहन जांच की जा रही है।

पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड, नियुक्ति प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े सभी पहलुओं का मिलान कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच से जुड़े कई और अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।

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