उत्तराखंड

UKSSSC पेपर लीक केस में सुमन, खालिद और साबिया पर आरोप तय होने की तैयारी, दोषी पाए गए तो उम्रकैद तक की सजा

देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पेपर लीक मामले में सीबीआई कोर्ट ने मुख्य आरोपी मोहम्मद खालिद, उसकी बहन साबिया और सह आरोपी सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ आरोप तय करने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य माने हैं। विशेष न्यायाधीश मदन राम की अदालत में हुई सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। आरोप तय होने और दोष सिद्ध होने की स्थिति में आरोपियों को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।

मामले में सीबीआई की जांच के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों की कथित संलिप्तता से जुड़े साक्ष्यों को पर्याप्त माना है। बचाव पक्ष की ओर से सुमन के बारे में दलील दी गई कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि उसे मिले प्रश्न असल भर्ती परीक्षा के हैं। वहीं, सीबीआई के लोक अभियोजकों ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्र पर विशिष्ट क्यूआर कोड मौजूद था।

नकल विरोधी कानून के तहत चलेगा मामला
यदि अदालत मोहम्मद खालिद, साबिया और सुमन के खिलाफ आरोप तय करती है तो उनके खिलाफ उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 के तहत मुकदमा चलेगा। इस कानून में पेपर लीक, नकल कराने, साजिश और परीक्षा की गोपनीयता भंग करने जैसे अपराधों को गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है।

दोष सिद्ध होने पर परीक्षा में धांधली से अर्जित संपत्ति जब्त किए जाने का भी प्रावधान है। वहीं, परीक्षा में अभ्यर्थी की संलिप्तता साबित होने पर उसे दो से पांच वर्ष तक प्रतियोगी परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जा सकता है। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद यह प्रतिबंध 10 वर्ष तक बढ़ सकता है।

परीक्षा केंद्र में मोबाइल लेकर पहुंचा था खालिद
सीबीआई जांच के मुताबिक 21 सितंबर 2025 को भर्ती परीक्षा के दौरान मुख्य आरोपी मोहम्मद खालिद नियमों के खिलाफ मोबाइल फोन लेकर आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट स्थित परीक्षा केंद्र में पहुंचा था। परीक्षा शुरू होने के बाद उसने प्रश्नपत्र के कुछ पन्नों की तस्वीरें खींचीं।

इसके बाद खालिद ने कक्षा निरीक्षक से शौचालय जाने की अनुमति ली। जांच में सामने आया कि परीक्षा केंद्र के शौचालय में जैमर नहीं लगा था। आरोप है कि खालिद ने इसी का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की तस्वीरें खींचीं और उन्हें बाहर भेज दिया।

कुछ ही मिनट में तैयार हुए प्रश्नों के जवाब
सीबीआई के अनुसार, प्रश्नपत्र की तस्वीरें मिलने के कुछ ही मिनट बाद सह आरोपी सुमन ने उनके उत्तर तैयार किए और व्हाट्सएप के जरिए खालिद को भेज दिए। जांच के मुताबिक, पकड़े जाने के डर से सुमन ने अपने मोबाइल से प्रश्नपत्र की तस्वीरें और संबंधित संदेश डिलीट कर दिए थे। हालांकि, सीबीआई को जांच के दौरान मिले तकनीकी साक्ष्यों से कथित गतिविधियों का पता चल गया।

अदालत ने साक्ष्यों को माना प्रथमदृष्टया पर्याप्त
विशेष न्यायाधीश मदन राम की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान तीनों आरोपियों की संलिप्तता से जुड़े साक्ष्यों को प्रथमदृष्टया पर्याप्त माना। अदालत ने यह भी माना कि सुमन प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया से परिचित थी। अब 18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर कार्रवाई होगी।

पेपर लीक के बाद प्रदेश में हुआ था बड़ा आंदोलन
यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में छात्रों और बेरोजगार युवाओं के बीच आक्रोश फैल गया था। राजधानी का परेड ग्राउंड कई दिनों तक आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना रहा। युवाओं और छात्र संगठनों के दबाव के बाद सरकार ने 21 सितंबर 2025 को हुई परीक्षा को रद्द कर दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

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