बारिश ने नक्सलियों की साजिश पर फेरा पानी! हजारों आईईडी बेअसर, सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन किया तेज

नई दिल्ली: देश के अलग-अलग हिस्सों में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद अब सुरक्षा बलों ने अपना पूरा फोकस सर्च अभियान पर केंद्रित कर दिया है। इसकी वजह यह है कि नक्सलियों ने पहले बड़े पैमाने पर जमीन के भीतर हजारों इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) दबा रखी थीं। इनमें रिमोट कंट्रोल, कमांड और प्रेशर से संचालित, इंफ्रारेड, मैग्नेटिक ट्रिगर, प्रेशर-सेंसिटिव बार और ट्रिप वायर के जरिए विस्फोट करने वाली आईईडी शामिल हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण इनमें लगी बैटरियां प्रभावित हो गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में आईईडी निष्क्रिय हो चुकी हैं।
बरसात के दौरान जमीन में पानी भरने और नमी बढ़ने से आईईडी में लगी बैटरियां करंट प्रवाहित नहीं कर पा रही हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगलों में दबाई गई विस्फोटक सामग्री पर बारिश का सबसे अधिक असर देखा जा रहा है। इसी कारण सुरक्षा बलों को राहत मिली है और अब प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान को और अधिक गति दी जा रही है।
जमीन में दबे विस्फोटक अब भी बने हुए हैं बड़ा खतरा
नक्सलवाद से मुक्त हो चुके क्षेत्रों में भी जमीन के भीतर दबाए गए विस्फोटक सुरक्षा बलों के लिए अब भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं। खासकर छत्तीसगढ़ और झारखंड के कई इलाकों में आईईडी का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पिछले दो वर्षों के दौरान नक्सलियों ने बड़ी संख्या में कच्चे और पक्के रास्तों पर बारूदी सुरंगें बिछाई थीं, क्योंकि वे सुरक्षा बलों के साथ सीधी मुठभेड़ करने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में रास्तों पर दबाई गई यही आईईडी अब भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
बरसात से पहले निकाल ली जाती थीं आईईडी की बैटरियां
जब नक्सलवाद अपने चरम पर था, तब नक्सली बरसात शुरू होने से पहले आईईडी में लगी बैटरियां निकाल लिया करते थे ताकि बारिश से उन्हें नुकसान न पहुंचे। यदि किसी आईईडी का पांच से छह महीने तक उपयोग नहीं किया जाता था तो उसकी बैटरी भी बदलनी पड़ती थी। इस वर्ष अप्रैल के बाद से अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति शांत बनी हुई है और सुरक्षा बल लगातार नियमित गश्त के साथ सघन सर्च अभियान चला रहे हैं।



