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127 कट्स के बाद रिलीज, फिर 48 घंटे में लगी रोक! दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर नया विवाद, खालड़ा परिवार ने बताया- यही है असली फिल्म

नई दिल्ली: लंबे समय तक सेंसर विवाद में उलझी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘पंजाब 95’, जिसे बाद में ‘सतलुज’ नाम दिया गया, आखिरकार ओटीटी पर रिलीज हुई, लेकिन इसकी स्ट्रीमिंग ज्यादा समय तक जारी नहीं रह सकी। रिलीज के करीब 48 घंटे के भीतर ही भारत में फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया और इसकी स्ट्रीमिंग पर रोक लगा दी गई। इस घटनाक्रम के बाद फिल्म एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई है।

बिना किसी कट के रिलीज होने का दावा

फिल्म की रिलीज के समय निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने दावा किया था कि दर्शकों के सामने फिल्म का मूल संस्करण पेश किया गया है और इसमें किसी तरह का कट नहीं लगाया गया। यही वजह रही कि फिल्म की रिलीज को लेकर काफी उत्सुकता देखने को मिली। जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार ने भी इस संस्करण का समर्थन किया था।

परमजीत कौर खालड़ा ने कही थी यह बात

जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने फिल्म रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा था कि ओटीटी पर उपलब्ध कराई गई ‘सतलुज’ वही मूल फिल्म है, जिसे सबसे पहले उनके परिवार को दिखाया गया था और जिसकी उन्होंने मंजूरी दी थी। हालांकि, उनका यह बयान फिल्म पर रोक लगाए जाने से पहले का था।

उन्होंने कहा था कि वर्षों के इंतजार और संघर्ष के बाद उनके पति के जीवन, न्याय की लड़ाई और उनके संघर्ष को दर्शकों तक पहुंचाने वाली फिल्म आखिरकार रिलीज हो सकी। उनके मुताबिक, तमाम दबाव और बदलाव की कोशिशों के बावजूद फिल्म की सच्चाई और मूल भावना को सुरक्षित रखा गया।

25 हजार से अधिक लावारिस शवों के मामले का जिक्र

परमजीत कौर खालड़ा ने अपने पोस्ट में दावा किया कि फिल्म में 25 हजार से अधिक लावारिस शवों के मामले और जसवंत सिंह खालड़ा की कानूनी लड़ाई को पूरी सच्चाई के साथ दिखाया गया है। उन्होंने निर्देशक हनी त्रेहान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारी दबाव के बावजूद फिल्म की ऐतिहासिक और कलात्मक सत्यता से समझौता नहीं किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फिल्म लोगों को न्याय, जवाबदेही, मानवाधिकार और सच्चाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सोचने के लिए प्रेरित करेगी।

तीन साल तक सेंसर प्रक्रिया में फंसी रही फिल्म

निर्देशक हनी त्रेहान के मुताबिक, फिल्म को वर्ष 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास प्रमाणन के लिए भेजा गया था, लेकिन करीब तीन साल तक इसे प्रमाणपत्र नहीं मिला। मेकर्स का दावा था कि बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने का सुझाव दिया था। इसके अलावा वर्ष 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रस्तावित फिल्म का प्रीमियर भी भारतीय अधिकारियों की आपत्तियों के बाद रद्द कर दिया गया था।

‘गल्लूघारा’ से बदलकर रखा गया ‘सतलुज’ नाम

हनी त्रेहान ने बताया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के पहले शीर्षक ‘गल्लूघारा’ पर भी आपत्ति जताई थी। इसके साथ ही शुरुआती क्रेडिट्स से ‘Inspired by True Events’ हटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया।

फिल्म में ये कलाकार आए नजर

फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाया है। उनके अलावा कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दिए हैं।

वर्षों तक सेंसर विवाद और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझी रहने के बाद रिलीज हुई ‘सतलुज’ अब भारत में महज 48 घंटे के भीतर स्ट्रीमिंग पर रोक लगने के कारण एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है।

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