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स्वस्थ दिखने वालों में भी छिपा हो सकता है दिल की धड़कन का खतरा! भारतीय रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली: स्वस्थ दिखने वाले लोगों में भी हृदय की धड़कन से जुड़ी आनुवंशिक गड़बड़ियां मौजूद हो सकती हैं। भारतीय शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी में सामने आया है कि खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानने वाले कुछ लोगों में भी ऐसी आनुवंशिक असामान्यताएं पाई गईं, जो हृदय की सामान्य धड़कन को प्रभावित कर सकती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह निष्कर्ष भविष्य में हृदय रोगों की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

जीनोम सीक्वेंसिंग में सामने आई अहम जानकारी

मेडिकल जर्नल ह्यूमन जीनोमिक्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, भारतीय शोधकर्ताओं ने 1,029 स्वयं को स्वस्थ बताने वाले लोगों के जीनोम का विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि इनमें करीब एक प्रतिशत लोगों में कार्डिएक चैनलोपैथी से जुड़े अलग-अलग आनुवंशिक वैरिएंट मौजूद थे, जो हृदय की विद्युत गतिविधियों और धड़कन की सामान्य प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या होती है कार्डिएक चैनलोपैथी?

विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डिएक चैनलोपैथी हृदय की कोशिकाओं में मौजूद प्रोटीन से जुड़ी एक आनुवंशिक असामान्यता है। यह हृदय की विद्युत प्रणाली को प्रभावित करती है, जिससे धड़कन अनियमित होने का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में व्यक्ति को लंबे समय तक इसकी जानकारी भी नहीं होती।

शोध में मिले 470 महत्वपूर्ण वैरिएंट

नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-आईजीआईबी के शोधकर्ताओं ने हृदय गति से जुड़े 36 प्रमुख जीनों के आधार पर अध्ययन किया। विश्लेषण के दौरान कुल 1,86,782 आनुवंशिक वैरिएंट की पहचान हुई, जिनमें से 470 को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया। इनमें लगभग 26 प्रतिशत यानी 124 वैरिएंट ऐसे थे, जिनका पहले किसी वैश्विक अध्ययन में उल्लेख नहीं मिला था।

विशेषज्ञों ने बड़े स्तर पर अध्ययन की बताई जरूरत

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ताओं डॉ. विनोद स्कारिया और डॉ. श्रीधर शिबाशुबु का कहना है कि भारतीय आबादी में इस तरह के शोध को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि इससे जोखिम वाले लोगों की समय रहते पहचान करने और भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां तैयार करने में मदद मिल सकती है।

दिल की बीमारियां बनी हुई हैं बड़ी चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले दस वर्षों के दौरान करीब 2.50 लाख लोगों की हार्ट अटैक से मौत हुई है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी रही, जिनकी उम्र 30 से 40 वर्ष के बीच थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में 21,914, वर्ष 2017 में 23,249, वर्ष 2018 में 25,764 और वर्ष 2019 में 28,005 लोगों की हार्ट अटैक से मृत्यु दर्ज की गई।

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