रेणुका झील के 100 मीटर दायरे में नहीं लगेंगी दुकानें-टेंट! हिमाचल हाईकोर्ट ने मेले को लेकर जारी किए सख्त आदेश

शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आगामी रेणुका जी मेले को लेकर पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर कई अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रेणुका झील, परशुराम ताल और पवित्र परिक्रमा मार्ग के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के व्यावसायिक स्टॉल या टेंट लगाने की अनुमति नहीं होगी। न्यायालय ने क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वन्यजीव अभयारण्य और आर्द्रभूमि की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ध्वनि प्रदूषण, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन को लेकर भी सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं।
100 मीटर के दायरे में व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी रोक
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधवालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने रेणुका जी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और नियामक व्यवस्थाओं से जुड़ी सीडब्ल्यूपीआईएल संख्या 46/2024 समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।
अदालत ने साफ किया कि रेणुका जी झील, परशुराम ताल और पवित्र परिक्रमा मार्ग के आसपास 100 मीटर के बफर जोन में दुकानें, व्यावसायिक स्टॉल और टेंट नहीं लगाए जा सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना और उन्हें धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक वातावरण का बिना किसी बाधा के दर्शन करने की सुविधा देना है।
अभयारण्य क्षेत्र में लाउडस्पीकर और तेज आवाज पर पाबंदी
ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी हाईकोर्ट ने कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेश के मुताबिक वन्यजीव अभयारण्य की सीमा के भीतर लाउडस्पीकर और तेज आवाज वाले ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मंचों का आयोजन भी अभयारण्य क्षेत्र से बाहर करना होगा।
हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मेले के दौरान प्रतिदिन ध्वनि प्रदूषण के स्तर की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
100 अस्थायी शौचालय और अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की होगी तैनाती
मेले में स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए अदालत ने प्रशासन को कम से कम 100 अस्थायी शौचालय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा पूरे आयोजन के दौरान साफ-सफाई बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की तैनाती भी करनी होगी।
प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक और निगरानी के लिए मेले के प्रवेश द्वारों पर संयुक्त उड़न दस्ते गठित किए जाएंगे। वहीं, दुकानदारों और विक्रेताओं को अपनी व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले पैकेजिंग कचरे को एकत्र करने और वापस ले जाने की जिम्मेदारी उठानी होगी। इससे कचरे के निस्तारण का पूरा बोझ स्थानीय प्रशासन पर नहीं पड़ेगा।
मेले से पहले और बाद में होगा संयुक्त निरीक्षण
हाईकोर्ट ने अपने निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन कराने के लिए एक निरीक्षण समिति गठित करने का प्रावधान भी किया है। इस समिति में न्याय मित्र, वन्यजीव विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी तथा उपायुक्त की ओर से नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति मेले के आयोजन से पहले और उसके बाद संयुक्त निरीक्षण करेगी। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी उपायों और अदालती आदेशों के अनुपालन की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया तेज करने के आदेश
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने रेणुका जी क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को कानून और सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार ऐसी अवैध संरचनाओं को हटाने के लिए कानूनी कार्रवाई में तेजी लाने को कहा है।
न्यायालय ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई करने पर जोर दिया। अदालत का कहना है कि धार्मिक मेले का आयोजन इस तरह होना चाहिए कि आर्द्रभूमि और वन्यजीव अभयारण्य की पर्यावरणीय संवेदनशीलता पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
15 दिसंबर को फिर होगी सुनवाई
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई और निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा के लिए 15 दिसंबर को सूचीबद्ध किया है। अब संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को अदालत के आदेशों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।



