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SIR पर आज देशभर में सियासी संग्राम! ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन, जवाब में बीजेपी निकालेगी पदयात्रा

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर को देशभर में सियासी घमासान तेज होने जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि SIR की प्रक्रिया रद्द की जाए, मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के मतदान के अधिकार बहाल किए जाएं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाकर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान शुरू करने जा रही है। ऐसे में शुक्रवार को SIR के मुद्दे पर विपक्ष और बीजेपी आमने-सामने होंगे।

‘हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर’, देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने 23 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। आंदोलन के लिए ‘हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर’ का नारा दिया गया है। गठबंधन की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है।

संयुक्त किसान मोर्चा और पीपल अगेंस्ट SIR मंच ने भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर विरोध जताने का आह्वान किया है। संगठनों का कहना है कि SIR के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके मतदान के अधिकार बहाल किए जाने चाहिए।

आयोजकों के मुताबिक, प्रदर्शन जिला और तहसील मुख्यालयों के साथ-साथ राज्यों की राजधानियों में भी आयोजित किए जाएंगे। दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने का आह्वान किया गया है।

200 से ज्यादा संगठनों ने बनाया गठबंधन, कई बड़े चेहरे होंगे शामिल

14 अक्टूबर को छात्रों, युवाओं, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर समुदायों से जुड़े संगठनों ने ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ के बैनर तले व्यापक गठबंधन बनाया था।

इसके बाद दिल्ली में आयोजित आपात बैठक में 200 से ज्यादा संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में आंदोलन को देशभर में फैलाने और 23 अक्टूबर को व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया।

प्रदर्शन में राजनीतिक अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर, वकील प्रशांत भूषण, किसान नेता राकेश टिकैत, सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी और छात्र नेता आईशे घोष सहित कई चर्चित चेहरों के शामिल होने की बात कही गई है।

पराकला प्रभाकर ने भी किया आंदोलन में शामिल होने का ऐलान

SIR के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर ने भी लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। वह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति हैं।

प्रभाकर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खाते पर पोस्ट कर 23 अक्टूबर को लोकतंत्र की बहाली के लिए जनमार्च में शामिल होने का आह्वान किया। उनके इस ऐलान के बाद प्रदर्शन में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्रदर्शन के पोस्टर में प्रकाश राज, प्रशांत भूषण और राकेश टिकैत समेत कई नाम

‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन की ओर से जारी पोस्टर में अभिनेता प्रकाश राज, वकील प्रशांत भूषण, पराकला प्रभाकर, किसान नेता राकेश टिकैत, तुषार गांधी, अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और आईशे घोष की तस्वीरें शामिल हैं।

आयोजकों का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक समूहों और संगठनों को एक मंच पर लाकर SIR के खिलाफ आंदोलन को व्यापक रूप देना है। गठबंधन ने साफ किया है कि यह विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को इससे जोड़ा जाएगा।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बढ़ी थी सुरक्षा, 7 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेने का दावा

इससे पहले 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। इसके बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोक दिया था। इस दौरान 7 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें विरोध दर्ज कराने के लिए निर्धारित स्थल तक भी नहीं पहुंचने दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद राजधानी में प्रदर्शन की अनुमति और विरोध जताने के अधिकार को लेकर सवाल उठे थे।

जंतर-मंतर पहुंचे CJP नेताओं को किया गया गिरफ्तार

13 अक्टूबर को CJP नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अंजिक्य शिंदे तिरंगा लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच जंतर-मंतर पहुंच गए थे। हालांकि, इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

इसके बाद 16 अक्टूबर को अभिजीत दिपके ने कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया था। लेकिन उन्हें कनॉट प्लेस पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था।

इन घटनाओं के बाद 23 अक्टूबर को प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन को लेकर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पाबंदियों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू, मार्च को लेकर प्रशासन की अनुमति अहम

10 अक्टूबर को प्रदर्शन के ऐलान के बाद नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

इस प्रावधान के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने, जुलूस निकालने, नारेबाजी करने या भाषण देने पर लिखित अनुमति के बिना रोक लगाई जा सकती है।

इसी पाबंदी के बीच 16 अक्टूबर को अभिजीत दिपके को कनॉट प्लेस पहुंचने से पहले हिरासत में लिया गया था। ऐसे में 23 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च के दौरान पुलिस की व्यवस्था और प्रशासन की अनुमति अहम रहने वाली है।

SIR के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के जवाब में बीजेपी का अभियान

एक तरफ विपक्षी गठबंधन SIR के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ बीजेपी भी अपने अभियान के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने जा रही है।

बीजेपी 23 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक जनसंपर्क अभियान का दूसरा चरण चलाएगी। इसे ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ नाम दिया गया है। पार्टी का कहना है कि इस अभियान के जरिए SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों और उसके दावों का जवाब जनता के सामने रखा जाएगा।

इस दौरान बीजेपी विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपना पक्ष लोगों तक पहुंचाएगी।

देशभर के जिलों में पदयात्रा निकालेगी बीजेपी, 10 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य

बीजेपी की योजना अभियान के तहत देशभर के सभी जिलों में पदयात्राएं निकालने की है। पार्टी इन कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर जनभागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी कर रही है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रत्येक पदयात्रा में करीब 10 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा बीजेपी के वरिष्ठ नेता देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

इन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पार्टी SIR पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देगी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपना पक्ष जनता के सामने रखेगी।

23 अक्टूबर को SIR पर विपक्ष और बीजेपी के अभियान होंगे आमने-सामने

23 अक्टूबर को ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के साथ बीजेपी के ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान की शुरुआत भी हो रही है।

विपक्षी गठबंधन SIR रद्द करने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहा है। वहीं बीजेपी पदयात्राओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।

ऐसे में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि देशभर में दोनों अभियानों को कितना जनसमर्थन मिलता है और दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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