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सीसीएसयू में 20 दिवसीय चित्रकला कार्यशाला में निखरी युवा कलाकारों की प्रतिभा

सीसीएसयू के ललित कला संस्थान में आयोजित भारतीय लोक कला परंपराओं के संरक्षण का सशक्त माध्यम बनी कार्यशाला।

Meerut CCSU News : चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के ललित कला संस्थान में आयोजित 20 दिवसीय ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशाला का भव्य समापन आज उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह कार्यशाला राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं विश्व नारी अभ्युदय संगठन, मेरठ चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
भारतीय लोक कला परंपराओं से जुड़ने का एक उत्कृष्ट मंच
कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला जी की प्रेरणा, मार्गदर्शन एवं निर्देशन में आयोजित यह कार्यशाला अत्यंत सफल, सार्थक एवं सराहनीय रही। उनके संरक्षण एवं प्रोत्साहन से कार्यशाला ने विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को भारतीय लोक कला परंपराओं से जुड़ने का एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। कार्यशाला का शुभारंभ 6 मई 2026 को कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला एवं अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया था। 25 मई 2026 को आयोजित समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अनिल कुमार यादव, कुलसचिव, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता, अध्यक्ष- साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ ने की कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
प्रतिभागियों की उपलब्धियों का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया
कार्यक्रम के दौरान संयोजक प्रोफेसर अलका तिवारी द्वारा 20 दिवसीय ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशाला की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की गई। जिसमें कार्यशाला के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कलात्मक गतिविधियों, प्रशिक्षण सत्रों, कलाकार संवादों एवं प्रतिभागियों की उपलब्धियों का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया गया।
लगभग 105 प्रतिभागियों ने सहभागिता की
प्रोफेसर अलका तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि 6 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 105 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यशाला के अंतर्गत भारतीय लोक कला परंपरा की विभिन्न विधाओं—मधुबनी, वर्ली, सांझी, लिप्पन आर्ट, रंगोली, मंडाना आदि कलाओं का प्रशिक्षण स्वतंत्र चित्रकार एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों डॉ. प्रिंस राज, सुश्री दीपांजली एवं सुश्री विनीता गुप्ता द्वारा प्रदान किया गया।
प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं सराहनीय रहा
कार्यशाला के दौरान समय-समय पर विभिन्न कला मर्मज्ञों, प्रशिक्षकों एवं आचार्यों द्वारा सहभागिता की गई। प्रोफेसर हरिकृष्ण, प्रोफेसर बीरपाल सिंह, प्रोफेसर बिंदु शर्मा, डॉ. वैशाली पाटिल आदि की गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं सराहनीय रहा।
कार्यशाला के दौरान अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में रामलला की मूर्ति का चित्रांकन करने वाले प्रसिद्ध चित्रकार एवं कला साधक डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, अध्यक्ष राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ तथा प्रसिद्ध चित्रकार डॉ. दुर्जन सिंह राणा द्वारा प्रतिभागियों को लाइव डेमोंस्ट्रेशन देकर यथार्थ चित्रण की सूक्ष्म बारीकियों से अवगत कराया गया।
प्रशिक्षकों को डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा द्वारा सम्मानित किया गया
कार्यशाला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवा प्रतिभागी कलाकारों एवं कला प्रशिक्षकों को डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा द्वारा सम्मानित भी किया गया। उन्होंने ललित कला संस्थान द्वारा कार्यशाला के सुंदर एवं सफल आयोजन हेतु संयोजक प्रोफेसर अलका तिवारी की सराहना करते हुए कहा कि अकादमी द्वारा विभिन्न स्थलों पर आयोजित कार्यशालाओं में ललित कला संस्थान की यह कार्यशाला सर्वश्रेष्ठ रही है।
कला एवं संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका
समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. अनिल कुमार यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को विकसित करने के साथ-साथ भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को निरंतर अभ्यास एवं सृजनशीलता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता ने कहा कि भारतीय लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं तथा युवा पीढ़ी को इन कलाओं से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
कला अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज को संवेदनशील बनाने का सशक्त साधन
बतौर अति विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर आराधना ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज को संवेदनशील बनाने का सशक्त साधन भी है। उन्होंने प्रतिभागियों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर अल्पना रस्तोगी एवं प्रोफेसर रंजू नारंग की गरिमामयी उपस्थिति प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रही। उन्होंने प्रतिभागियों के कलात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रदान कीं।
प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए
मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा कार्यशाला के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। साथ ही कला प्रशिक्षकों डॉ. प्रिंस राज, सुश्री विनीता गुप्ता एवं सुश्री दीपांजलि को प्रशस्ति पत्र एवं पटका पहनाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की संयोजक प्रोफेसर अलका तिवारी को भी कार्यशाला के सफल संचालन एवं उत्कृष्ट आयोजन हेतु माननीय मुख्य अतिथि डॉ. अनिल कुमार यादव, कुलसचिव, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा पटका पहनाकर सम्मानित किया गया। उन्होंने प्रोफेसर अलका तिवारी के समर्पित प्रयासों एवं सफल आयोजन की सराहना करते हुए कार्यशाला को अत्यंत प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी बताया।
कार्यशाला में इनका रहा सहयोग
कार्यशाला के सफल आयोजन में डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ, डॉ. शालिनी, डॉ. रीता सिंह, सुश्री दीपांजलि, कृतिका एवं सुदेश कुमार का विशेष सहयोग रहा। वहीं छात्र स्तर पर रिद्धिमा, श्रेया, आंचल, मेघा मंडल, आर्यन त्यागी, निशा, विनीत गुप्ता, खुशबू एवं हिमानी का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा।

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