
नई दिल्ली: सनातन परंपरा में प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष महत्व है, लेकिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु का व्रत एवं पूजन करने से हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन योगिनी एकादशी व्रत कथा का श्रवण और पाठ करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी की पौराणिक व्रत कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को योगिनी एकादशी का महत्व बताते हुए यह कथा सुनाई थी। स्वर्गलोक की अलकापुरी नगरी में धन के देवता कुबेर का शासन था। वे भगवान शिव के परम उपासक थे। उनके यहां हेम नाम का एक माली प्रतिदिन मानसरोवर से भगवान शिव की पूजा के लिए पुष्प लेकर आता था। हेम अपनी अत्यंत सुंदर पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था।
एक दिन वह फूल लेकर तो लौट आया, लेकिन पत्नी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए पुष्प नहीं पहुंचा सका। इस बात से क्रोधित होकर कुबेर ने उसे श्राप दिया कि वह अपनी पत्नी से अलग होकर पृथ्वी पर कोढ़ी के रूप में जीवन व्यतीत करेगा।
श्राप के प्रभाव से हेम तत्काल पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर कोढ़ से ग्रस्त हो गया और पत्नी से भी उसका वियोग हो गया। लंबे समय तक कष्ट झेलने के बाद वह महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी दयनीय अवस्था का कारण पूछा तो हेम ने पूरी घटना विस्तार से सुनाई।
हेम की पीड़ा सुनने के बाद महर्षि मार्कण्डेय ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। हेम ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत का पालन किया। व्रत के प्रभाव से उसका श्राप समाप्त हो गया, उसे अपना पूर्व स्वरूप वापस मिल गया और वह पुनः अपनी पत्नी के साथ सुखपूर्वक रहने लगा। इसी कारण योगिनी एकादशी को पापों से मुक्ति, रोगों से राहत और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है।
योगिनी एकादशी की पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। विधि-विधान से भगवान को पुष्प, फल, नैवेद्य अर्पित करें तथा दीप प्रज्ज्वलित कर आरती करें। इस दिन गुड़ और चने का भोग लगाना भी शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।



