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योगिनी एकादशी पारण आज, शुभ मुहूर्त में ही खोलें व्रत, जानें सही विधि और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

नई दिल्ली: सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी व्रत के बाद द्वादशी तिथि पर निर्धारित समय में पारण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पारण सही समय पर नहीं किया जाए तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आज, 11 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी व्रत का पारण किया जा रहा है।

योगिनी एकादशी पारण का शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत का पारण आज दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शाम 4 बजकर 36 मिनट तक किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

इस विधि से करें व्रत का पारण

पारण के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाकर पीले पुष्प, तुलसी दल और फल अर्पित करें। व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को सात्विक भोजन कराने अथवा अन्न, तिल और वस्त्र का दान करने की परंपरा भी बताई गई है। पारण के समय भगवान विष्णु का प्रसाद तुलसी दल के साथ ग्रहण करने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है। भोजन पूरी तरह सात्विक और सुपाच्य होना चाहिए तथा इसमें लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

पारण के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरि वासर के दौरान भूलकर भी व्रत का पारण नहीं करना चाहिए। द्वादशी तिथि में पूजा के बाद चावल का सेवन शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पारण के दिन क्रोध, विवाद और कलह से दूर रहकर शांत और सकारात्मक मन से भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए।

योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में योगिनी एकादशी को पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी माना गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत तथा समय पर पारण करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने के साथ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है।

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