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11 नवंबर को बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट, जानें कब और कहां होंगे मां यमुना के दर्शन

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में शामिल यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। विजयादशमी के पावन अवसर पर कपाट बंद करने की तिथि और शुभ मुहूर्त तय किया गया। इसके साथ ही शीतकाल में मां यमुना की पूजा-अर्चना और दर्शन की व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु अगले छह महीने तक खरसाली स्थित खुशीमठ में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।

भैयादूज पर सुबह 10:28 बजे बंद होंगे कपाट

तीर्थ पुरोहितों और मंदिर समिति से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार, 11 नवंबर को भैयादूज के पावन पर्व पर सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर शुभ मुहूर्त में यमुनोत्री धाम के कपाट बंद किए जाएंगे। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। निर्धारित समय पर कपाट बंद होने के बाद धाम में नियमित दर्शन की प्रक्रिया शीतकाल के लिए स्थगित हो जाएगी।

खरसाली के खुशीमठ में होंगे मां यमुना के दर्शन

यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की पूजा-अर्चना उनके शीतकालीन गद्दी स्थल खरसाली स्थित खुशीमठ में की जाएगी। अगले छह महीने तक श्रद्धालु यहीं मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर अपनी आस्था प्रकट कर सकेंगे। इस व्यवस्था के तहत धाम के कपाट बंद रहने के बावजूद मां यमुना की पूजा की परंपरा जारी रहेगी।

चारधाम यात्रा में यमुनोत्री का विशेष धार्मिक महत्व

यमुनोत्री धाम उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है और चारधाम यात्रा में इसका विशेष महत्व है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। गर्मियों में यात्रा के दौरान धाम में दर्शन होते हैं, जबकि सर्दियों के आगमन पर परंपरा के अनुसार कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

भैयादूज पर कपाट बंद होने के साथ ही यमुनोत्री धाम की नियमित यात्रा का एक चरण पूरा हो जाएगा। इसके बाद शीतकालीन प्रवास के दौरान खरसाली के खुशीमठ में अगले छह महीने तक मां यमुना की पूजा-अर्चना जारी रहेगी। इससे हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन होता रहेगा।

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