देहरादून: उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन को अधिक सटीक, पारदर्शी और समन्वित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी परियोजनाओं में जियोस्पेशियल तकनीक आधारित मैपिंग को अनिवार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने नियोजन विभाग की ओर से आयोजित पीएम गतिशक्ति उपयोग मामलों का संग्रह 2.0 के विमोचन और विभागीय डेटा संग्रहण के लिए विकसित मोबाइल एप्लीकेशन के शुभारंभ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जियोस्पेशियल तकनीक के जरिए पृथ्वी पर किसी भी स्थान से जुड़ी जानकारी को एकत्रित, विश्लेषित, प्रदर्शित और उपयोग किया जा सकता है, जो राज्य के अवसंरचना विकास में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पर्वतीय राज्य के लिए गेम चेंजर साबित होगी तकनीक
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए पीएम गतिशक्ति पोर्टल और जियोस्पेशियल तकनीक अत्यंत उपयोगी साबित होगी। इसके माध्यम से सड़क, बिजली लाइन, पेयजल परियोजनाएं, रेलवे लाइन, भवन निर्माण, बांध और अन्य बड़ी परियोजनाओं की बेहतर योजना और निगरानी संभव हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना की जियो लोकेशन तय करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में यह तकनीक अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही पूरे उत्तराखंड का समग्र मास्टर प्लान तैयार करने में भी इसका विशेष महत्व रहेगा।
डेटा इंटीग्रेशन से बढ़ेगा विभागों के बीच तालमेल
मुख्य सचिव ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा लाभ विभिन्न विभागों के बीच डेटा इंटीग्रेशन के रूप में सामने आएगा। उन्होंने सभी विभागों से अधिक से अधिक प्रमाणिक और अद्यतन जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जितना अधिक डेटा उपलब्ध होगा, योजनाओं की गुणवत्ता और परिणाम उतने ही बेहतर होंगे। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

व्यय वित्त समिति की बैठकों में होगा पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल
मुख्य सचिव ने नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि व्यय वित्त समिति की बैठकों में पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। उनका कहना था कि इससे योजनाओं का अधिक सटीक और व्यापक मूल्यांकन किया जा सकेगा।
इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली सभी परियोजनाओं में साइट चयन समिति जियोस्पेशियल तकनीक के माध्यम से मैपिंग सुनिश्चित करेगी। साथ ही सभी नई स्वीकृत योजनाओं को भी पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से परियोजनाओं में दोहराव की संभावना समाप्त होगी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।
हर विभाग में बनाए जाएंगे मास्टर रिसोर्स पर्सन
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को मास्टर रिसोर्स पर्सन चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि स्वेच्छा से इस जिम्मेदारी को निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय संस्था द्वारा विकसित इस एप्लीकेशन को राज्य के प्रगति पोर्टल ‘उन्नति’ के साथ एकीकृत करने पर भी जोर दिया। साथ ही विभागों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता के लिए नियमित रूप से कार्यशालाओं में भाग लेने और विशेषज्ञ संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव एल. फैनाई, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ. एस.एन. पांडेय, श्रीधर बाबू अद्धांकी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।




