
नई दिल्ली : तमिलनाडु की राजनीति में उस वक्त नया भूचाल आ गया, जब विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि अभिनेता-राजनेता जोसेफ विजय (Tamil Nadu Politics) को सत्ता से दूर रखने के लिए द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) एक साथ आने की तैयारी में थे। इतना ही नहीं, दोनों दलों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने तक का प्रस्ताव दिया था।
तमिलझा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय की सरकार को समर्थन दे चुके वीसीके चीफ ने खुलासा किया कि चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलकों में तेजी से समीकरण बदले थे। उन्होंने कहा कि विजय के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए दोनों प्रमुख द्रविड़ दलों ने संभावित गठबंधन को लेकर उनसे संपर्क किया था।
“मुझे मुख्यमंत्री बनाने पर भी सहमति बन चुकी थी”
थोल थिरुमावलवन ने कहा, “मुझे सूचना मिली थी कि डीएमके और एआईएडीएमके मुझे मुख्यमंत्री बनाने पर सहमत हो चुके थे। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद हमने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।” उनके इस बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। गौरतलब है कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसी अटकलें तेज थीं कि विजय के सत्ता तक पहुंचने को रोकने के लिए दोनों धुर-विरोधी दल एकजुट हो सकते हैं। हालांकि उस समय दोनों पार्टियों ने इन खबरों का खंडन कर दिया था।
वीसीके प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी की ओर से कहा गया कि ऐसा कोई प्रस्ताव कभी नहीं दिया गया। बावजूद इसके, थिरुमावलवन के बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।
इस बीच, एआईएडीएमके के कुछ विधायकों का पार्टी लाइन से हटकर विजय के समर्थन में आना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। 120 विधायकों के समर्थन के साथ विजय बहुमत के बेहद करीब पहुंच गए हैं और इन अतिरिक्त समर्थन ने उनकी स्थिति को और मजबूत कर दिया है।
थोल थिरुमावलवन ने विजय को समर्थन देने में हुई देरी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा, “हम जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहते थे। 8 मई को पार्टी नेताओं के साथ बैठक हुई, जिसमें हम निर्णय पर पहुंच गए थे, लेकिन तत्काल घोषणा करना उचित नहीं समझा।”
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद विजय की राह आसान नहीं रही। कांग्रेस के समर्थन के बाद भी पार्टी बहुमत से दूर थी। बाद में वाम दलों, IUML और अंत में वीसीके के समर्थन से विजय को 120 विधायकों का समर्थन हासिल हुआ।
हालांकि सरकार गठन के बाद भी चुनौतियां बनी हुई हैं। समर्थन देने वाली वामपंथी पार्टियां और वीसीके शुरुआती दिनों से ही कई मुद्दों पर विजय सरकार की आलोचना करती नजर आ रही हैं।



