मध्य प्रदेशराज्य

नंदानगर अस्पताल पर 20 लाख का किराया बाकी, ट्रस्ट ने ताला जड़ने की दी चेतावनी

इंदौर : मजदूरों के हितों के लिए बनाई गई गांधी मजदूर स्मारक ट्रस्ट की जमीन (Rent) का किराया वर्षों से अटका हुआ है। ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग ट्रस्ट की जमीन पर अस्पताल और स्कूल संचालित कर रहे हैं, लेकिन किराया नहीं दे रहे। ट्रस्ट ने लगभग 20 से 22 लख रुपए का किराया बाकी होने का हवाला देते हुए बताया कि नगर निगम ने लगभग 2 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स भरने का नोटिस दिया है। परेशान ट्रस्ट के मंत्री ने कहा कि अब यदि जेल भी जाना पड़ा तो जाऊंगा, लेकिन किराया नहीं मिला तो बिल्डिंग में ताले लगा दूंगा।

गांधी मजदूर स्मारक ट्रस्ट के मंत्री लक्ष्मीनारायण मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में गुहार लगाने पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मामले का निराकरण करने की बजाय विभाग उलझने का काम कर रहा है कलेक्टर के सामने ही सीएमएचओ और ट्रस्ट के मंत्री के बीच कहासुनी की नौबत आ गई। मामले में मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा ने दोनों विभागों को जल्द निराकरण के निर्देश दिए हैं।

ट्रस्ट के मुताबिक नंदानगर स्थित ट्रस्ट की जमीन पर पहले प्रसूति गृह था, जहां अब नया सरकारी अस्पताल बनकर तैयार हो चुका है। वर्ष 2022 के बाद से अस्पताल की जमीन का किराया ट्रस्ट को नहीं मिला। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग जमीन का उपयोग तो कर रहा है, लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा। 49 हजार रुपए हर महीने तय किया गया था। सीएमएचओ माधव हसानी के अनुसार वह भोपाल स्थित विभाग को पत्र लिख चुके हैं। आज एक और रिमाइंडर जारी किया जाएगा

सिर्फ अस्पताल ही नहीं, शिक्षा विभाग पर भी ट्रस्ट की जमीन का किराया रोकने का आरोप है। ट्रस्ट के अनुसार वर्ष 2010 से नंदानगर स्थित गोल स्कूल की जमीन का किराया नहीं दिया गया। यहां भी सालों से स्कूल संचालित किया जा रहा है, लेकिन किराया देने के नाम पर सरकारी विभाग ही कागजी खानापूर्ति कर रहा है। एक ओर विभाग किराया नहीं दे रहे, दूसरी ओर नगर निगम ने ट्रस्ट को डेढ़ लाख रुपए से अधिक के प्रॉपर्टी टैक्स का नोटिस थमा दिया है। ट्रस्ट पदाधिकारियों का कहना है कि किराया राशि नहीं मिलने से न तो टैक्स जमा कर पा रहे हैं और न ही कर्मचारियों को वेतन दे पा रहे हैं।

ट्रस्ट को मिलने वाली किराया राशि से मजदूरों के हित में सामाजिक और कल्याणकारी गतिविधियां संचालित होती थीं। लगातार किराया नहीं मिलने से ये गतिविधियां फिलहाल बंद पड़ी हैं। ट्रस्ट के मंत्री ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि दोनों जमीनें ट्रस्ट की हैं और विभागों को तत्काल बकाया राशि चुकानी चाहिए, नहीं तो ट्रस्ट कड़ा रुख अपनाने को मजबूर हो सकता है।

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