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US-ईरान डील की 14 बड़ी शर्तें आईं सामने! तेल प्रतिबंध हटाने से लेकर होर्मुज खोलने तक, दुनिया की नजरें समझौते पर टिकीं

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। उनका कहना है कि इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता साफ होगा और वर्षों से तनावपूर्ण रहे अमेरिका-ईरान संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में इस संभावित समझौते को ऐतिहासिक बताया और इसकी तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते से की। ट्रंप ने कहा कि नया समझौता यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।

ईरानी मीडिया ने बताईं समझौते की अहम शर्तें

ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता कई महत्वपूर्ण शर्तों पर आधारित है। यदि इन शर्तों पर अमल होता है तो पश्चिम एशिया की भू-राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

क्या हैं US-ईरान समझौते की 14 प्रमुख शर्तें?

पहली शर्त के तहत ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल और उससे जुड़े निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएंगे।

ईरान को उसके वित्तीय संसाधनों तक फिर से पूर्ण पहुंच प्रदान की जाएगी।

60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की राशि जारी की जाएगी। इसमें से 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले जारी किए जाने की बात कही गई है।

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 300 अरब डॉलर की योजनाएं प्रस्तुत करनी होंगी।

लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर जारी सैन्य संघर्ष को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा।

अमेरिका ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का आश्वासन देगा।

अमेरिका द्वारा लागू नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।

अमेरिकी सैन्य बलों को ईरान के आसपास के क्षेत्रों से हटाने का प्रावधान भी शामिल है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान की निगरानी व्यवस्था के तहत 30 दिनों के भीतर दोबारा खोला जाएगा।

परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों को लेकर अंतिम व्यापक समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

ईरान परमाणु अप्रसार संधि के तहत परमाणु हथियार नहीं बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएगा।

अमेरिका बातचीत के दौरान क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात नहीं करेगा और नई पाबंदियां लगाने से भी परहेज करेगा।

समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष तंत्र बनाया जाएगा और अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और विभिन्न प्रतिरोध समूहों को मिलने वाला समर्थन इस समझौते के दायरे में शामिल नहीं होगा।

कुछ शर्तें पूरी होने के बाद ही आगे बढ़ेगी अंतिम बातचीत

रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम और व्यापक वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान को 12 अरब डॉलर की पहली राशि जारी नहीं कर दी जाती, तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां नहीं हट जातीं और नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।

वैश्विक बाजार और तेल कीमतों पर रहेगी नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता आगे बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होती हैं, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होने और तेल आयात करने वाले देशों को लाभ मिलने की संभावना है।

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