POK में खूनी बवाल! लॉन्ग मार्च पर फायरिंग का दावा, 40 मौतों के बीच संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचा मामला

मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शन हिंसक मोड़ लेने का दावा किया जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में निकाले गए लॉन्ग मार्च के दौरान पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स पर प्रदर्शनकारियों ने अंधाधुंध फायरिंग का आरोप लगाया है। खबरों के अनुसार, इस घटना में 40 लोगों की मौत होने और 200 से अधिक नागरिकों के गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया गया है। घटना के बाद पीओके के कई इलाकों में तनाव गहरा गया है और मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गया है।
बताया गया है कि 5 जून से चल रहे आंदोलन में स्थानीय नागरिक आर्थिक और नागरिक अधिकारों की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी सफेद झंडे लेकर रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सुरक्षा बलों ने उन पर गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले दागे। इसके बाद क्षेत्र में हालात और अधिक बिगड़ गए।
संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग
घटना के बाद जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में निहत्थे नागरिकों पर कथित गोलीबारी रोकने, रावलकोट में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों और मानवीय सहायता टीमों की तैनाती की अपील की गई है।
वहीं, मुजफ्फराबाद स्थित ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ आजाद जम्मू एंड कश्मीर ने भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव, रेड क्रॉस, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच से मामले में हस्तक्षेप करने और हालात की निगरानी की मांग की है।
अस्पतालों और नागरिकों को लेकर भी गंभीर आरोप
आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि फायरिंग के बाद रावलकोट के मुख्य सरकारी अस्पताल पर सुरक्षा बलों ने नियंत्रण कर लिया, जिससे घायल लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल सका। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मृतकों के परिजनों को शव सौंपने में भी बाधाएं उत्पन्न की गईं।
महिलाओं और बच्चों पर कार्रवाई के आरोप
स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि बाग, कोटली, मीरपुर, रावलकोट और मुजफ्फराबाद सहित कई क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान महिलाओं और नाबालिग बच्चों को भी निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी पाकिस्तान सरकार की ओर से हताहतों के आधिकारिक और समेकित आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
रक्षा मंत्री का सख्त बयान
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों से कोई बातचीत नहीं करेगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से करते हुए उन्हें पाकिस्तान का दुश्मन बताया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार विरोध कर रहे लोगों के साथ संवाद के पक्ष में नहीं है।
आतंकवाद विरोधी अभियानों में 32 आतंकवादी मारे जाने का दावा
इसी बीच पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में अलग-अलग आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान 32 आतंकवादी मारे गए। सेना के अनुसार, 28 और 29 जुलाई की रात खैबर जिले में हुई कार्रवाई में 24 आतंकवादी मारे गए, जबकि बलूचिस्तान के नुश्की जिले में आठ आतंकवादी ढेर किए गए। अभियान के दौरान हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद किए जाने का भी दावा किया गया।



