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इसलिए लोग होते हैं स्लीप वॉकिंग के शिकार, जानें इसके लक्षण और बचाव

स्लीप वाकिंग को नींद में चलना कहते हैं। यह एक तरह की अजीब बीमारी है जिसमें  व्यक्ति गहरी नींद में चलने लगता है और नींद समाप्त होने पर उसे कुछ याद नहीं रहता है। दरअसल यह एक मेडिकल सिचुएशन होता है जिसे सोनामबुलिज्म भी कहा जाता है। ऐसी स्थिति में इंसान नींद में उठकर बैठ जाता है और कई बार तो चलने भी लगता है। इतना ही नहीं कुछ लोग नींद में चलने पर कुछ क्रिया भी करने लगते है जैसे बोलना बड़बड़ाना और खुली आंखो से चलना जैसे की वह व्यक्ति जागा हुआ है। ऐसी समस्या का अगर सही समय पर इलाज करा लिया तो इसे बढऩे से रोका जा सकता है। आईए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

स्लीप वाकिंग के क्या है लक्षण

  • स्लीपवॉकिंग के लक्षण में रोगी का बिस्तर से उठना
  • इधर उधर घूमने लगना
  • बिस्तर पर बैठ जाना
  • अपनी आंखें खोलकर रखना
  • दूसरों के साथ किसी तरह की प्रतिक्रिया या बातचीत न करना
  • जागने के बाद थोड़े समय के लिए विचलित या भ्रमित होना आदि रहता है।

स्लीप वाकिंग से खतरा

कई बार स्लीपवॉकिंग इतनी भयानक हो जाती है कि सोते वक्त डेली रुटीन की एक्टिवीटज करने लगते है जैसे कि कपड़े पहनना, बात करना या भोजन खाना आदि, घर छोडक़र बाहर चले जाना, नींद में कार चलाना, पेशाब करना, सीढिय़ों या खिडक़ी से नीचे गिर जाना आदि। कई बार यह जोखिम का कारण भी बन जाता है। ऐसे में इन लोगों को फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए इसके अलावा मेडिकल कंडीशन एक मात्र सहारा है जिससे ऐसे लोग इस बीमारी से बाहर आ सकते हैं।

स्लीप वाकिंग के कारण क्या है ?

  • बुखार होना।
  • तनाव में रहना।
  • स्ट्रोक होना।
  • नार्कोलेप्सी।
  • थायरॉइड।
  • सिर में चोट लग जाना।
  • नींद संबंधित समस्या का विकार होना।

स्लीप वाकिंग के बचाव

  • स्लीप वाकिंग यानि की नींद में चलने की विशेष उपचार नहीं है, हलाकि इस पर शोध जारी है। लेकिन इस बीच हम अपनी कुछ आदतों को सुधार सकते हैं। जैसे कि-
  • नींद में चलने वाले लोगो को चोट लगने से बचाव करना चाहिए।
  •  नींद में चलने की समस्या बड़ो के बजाय बच्चो में अधिक होता है। यह उम्र के साथ बढ़ता जाता है और बाद में जोखिम बन जाता है। -अगर नींद के अलावा स्वास्थ्य से जुडी अन्य समस्या है तो इसका भी उपचार करवाए।
  • अगर नींद में चलने की समस्या व्यक्ति को दुर्घटना की तरफ ले जा रहा है तो घर पर सावधानी बरते जैसे कि घर की खिड़किया और दरवाजे को बंद रखे।
  • अगर आपका बच्चा सो नहीं पा रहा है तो उसे अकेला न छोड़े बल्कि साथ में सोएं।

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