अद्धयात्म

ये है वो काम जिन्हें निर्वस्त्र होकर कभी नहीं करना चाहिए!

विष्णु पुराण के अनुसार मनुष्य के कल्याण के लिए कई तरह के नियम बनाए गए हैं और उनके बारे में विवरण भी किया गया है। इनमें खान-पान से लेकर कपड़े पहनने को लेकर कई नियम शामिल हैं। विष्णु पुराण के अनुसार कुछ काम ऐसे हैं, जिन्हें निर्वस्त्र होकर करना अपमान के समान है और साथ ही वह इंसान पाप का भागीदार भी बनता है। आपको बताने जा रहे है कि आखिर वह कौन से 4 काम है जिन्हें निर्वस्त्र होकर कभी नहीं करना चाहिए….

1. निर्वस्त्र होकर स्नान ना करें
विष्णु पुराण के एक अध्याय में यह बात साफ कही गई है कि मनुष्य को पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर स्नान कभी नहीं करना चाहिए। याद रखें कि स्नान करते समय शरीर में कम से कम एक कपड़ा तो ज़रूर होना चाहिए। भगवान कृष्ण ने भी गोपियों को यह सलाह दी थी कभी नग्न होकर स्नान नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से जल देवता का अपमान माना जाता है। यह हम सभी जानते हैं कि जल हमारे जीवन के लिए कितनी आवश्यक है। इंसान का जल के बिना जीवन सोचना नामुमकिन है। जल है तो जीवन है… इसलिए जल देवता को आप प्रसन्न रखना चाहते हैं, तो गलती से भी निर्वस्त्र होकर ना नहाएंं।

2. निर्वस्त्र होकर ना सोएं
वहीं, विष्णु पुराण के अनुसार निर्वस्त्र होकर कभी सोना भी नहीं चाहिए,क्योंकि ऐसा करने से चंद्र देवता नाराज़ हो जाते हैं। साथ ही पितृगण रात के समय अपने परिजनों को देखने के लिए आते हैं और ऐसे में किसी को निर्वस्त्र देखकर उनकी आत्मा बहुत दुखी हो जाती है और वह बिना आशीर्वाद दिए ही वापस लौट जाते हैं। ध्यान रहें कि रात में नग्न होकर सोने से आप पर नकारात्मक शक्तियां हावी हो सकती हैं और आपकी ज़िंदगी हैरानी और परेशानी में व्यतित होगी।

3. आचमन के दौरान निर्वस्त्र ना रहें
याद से मनुष्य को आचमन के दौरान नग्न अवस्था में कभी नहीं रहना चाहिए, ऐसा करना विधि के खिलाफ होता है। बता दें कि आचमन के दौरान आंतरिक शुद्धि होती है और इसी तरह शुद्ध मन से की गई पूजा ही शुभ मानी जाती है। गलती से कोई गलत कार्य हो भी जाए तो आचमन द्वारा शुद्धि ज़रूर कर लेनी चाहिए।

4. निर्वस्त्र होकर पूजा ना करें
बहुत से लोग ऐसे हैं जो रोजाना निर्वस्त्र होकर ही देवी-देवता की पूजा और अराधना करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कपड़े अशुभ होते हैं और वह पहनकर पूजा करना कभी सफल नहीं होता है। कपड़े ना पहनकर पूजा करना आपको कोई सफल पूजा का शुभ फल नहीं प्राप्त कराएगा बल्कि पापा का भागीदार बनाएगा। यह सत्य हैं कि पूजा या फिर यज्ञ के दौरान बिना सिले हुए वस्त्र धारण करने का विधान है और ऐसा इसलिए है, क्योंकि सिलाई जो है वह सांसारिक मोह-माया के बंधन का प्रतीक माना गया है। भला हम यह कैसे भूल सकते हैं कि भगवान की पूजा हर बंधन से अलग होकर करनी चाहिए।

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