ईरान जंग में तबाह हुए मिडिल ईस्ट के मुल्कों की मदद के लिए आगे आए 11 देश, विश्व बैंक- IMF से की अपील

तेरहान : ब्रिटेन और जापान समेत 11 देशों के वित्त मंत्रियों ने ईरान जंग (Iran War) में तबाह हुए मध्य-पूर्व के मुल्कों की ‘समन्वित’ आर्थिक मदद की अपील की है। इन देशों ने बुधवार (15 अप्रैल) को विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से अपील की है कि प्रभावित देशों को “समन्वित आपातकालीन सहायता” उपलब्ध कराई जाए, ताकि जरूरत के हिसाब से वित्तीय मदद और लचीले टूलकिट उपलब्ध कराए जा सकें। ब्रिटिश सरकार द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में मंत्रियों ने कहा, “हम IMF और विश्व बैंक से अपील करते हैं कि वे ज़रूरतमंद देशों को समन्वित आपातकालीन सहायता प्रदान करें; यह सहायता उन देशों की परिस्थितियों के अनुरूप हो और इसमें उनके पास उपलब्ध सभी संसाधनों और लचीलेपन का पूरा इस्तेमाल किया जाए।”
बयान में आगे कहा गया है, “अगर ईरान-अमेरिका के बीच शत्रुता फिर से शुरू हुई या संघर्ष का दायरा बढ़ा या होर्मुज़ समुद्री मार्ग में लगातार बाधाएं आती रहीं तो ये वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, उनकी सप्लाई चेन और दुनिया की आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के लिए यह गंभीर अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती हैं।”
इस बीच, रायटर्स ने ऊर्जा रिसर्च कंपनी Rystad Energy के डेटा का हवाला देते हुए बताया है कि मध्य-पूर्व युद्ध के कारण इस क्षेत्र को ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर 58 अरब डॉलर तक का खर्च उठाना पड़ सकता है; इसमें अकेले तेल और गैस सुविधाओं पर ही 50 अरब डॉलर तक का खर्च शामिल है। यह अनुमान रिसर्च फर्म के तीन हफ़्ते पहले के शुरुआती 25 अरब डॉलर के अनुमान से काफ़ी ज़्यादा है। यह 8 अप्रैल को US और ईरान के बीच हुए संघर्ष-विराम से पहले हुए नुकसान के व्यापक दायरे को दर्शाता है।
Rystad के सीनियर एनालिस्ट करण सतवानी कहते हैं, “मरम्मत के काम से कोई नई क्षमता नहीं बनती। यह मौजूदा क्षमता को दूसरी तरफ़ मोड़ देता है, और इस बदलाव का असर प्रोजेक्ट में देरी और महंगाई के रूप में मध्य-पूर्व से कहीं दूर तक महसूस किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि 58 अरब डॉलर का बिल तो सिर्फ़ मुख्य बात है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ऊर्जा निवेश की समय-सीमा पर पड़ने वाले इसके दूरगामी प्रभाव भी उतने ही महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।”
Rystad का कहना है कि मरम्मत पर कुल खर्च औसतन लगभग 46 अरब डॉलर रहने की संभावना है; इसमें डाउनस्ट्रीम रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल संपत्तियों का हिस्सा सबसे ज़्यादा होगा, क्योंकि वे काफ़ी जटिल होती हैं और उन्हें नुकसान भी बड़े पैमाने पर हुआ है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि औद्योगिक, बिजली और विलवणीकरण (desalination) संपत्तियों की मरम्मत पर अतिरिक्त 3 अरब से 8 अरब डॉलर तक का खर्च आ सकता है।



