
जयपुर: राजस्थान के तिजारा नगर परिषद में चेयरमैन पद के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस समर्थित 18 पार्षदों को हरियाणा के चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास रोके जाने को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि हिमाचल प्रदेश से बाड़ेबंदी से लौट रहे इन पार्षदों को पुलिस ने रोककर हिरासत में लिया और उन्हें पिंजौर थाने ले जाया गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्षदों के खिलाफ चुनाव की घोषणा के बाद मामले दर्ज किए गए थे और गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से कार्रवाई का आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।
देर रात हाईकोर्ट में हुई थी सुनवाई
राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले कई पार्षदों और उम्मीदवारों ने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत ने अलग-अलग मामलों में कुछ पार्षदों को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी से सुरक्षा दी। बीकानेर के कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद और हनुमानगढ़ के 9 पार्षदों को भी गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला।
तिजारा के 18 पार्षदों के मामले में कांग्रेस का दावा है कि गिरफ्तारी पर रोक के बावजूद उन्हें हरियाणा में रोक लिया गया। इस दावे की पुष्टि के लिए पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पंचकूला में थाने के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन
पार्षदों को रोके जाने की सूचना के बाद राजस्थान से कांग्रेस नेता और उनके समर्थक पंचकूला पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए पिंजौर थाने के बाहर धरना दिया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि चेयरमैन पद के लिए मतदान से ठीक पहले पार्षदों को रोकने का मकसद चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना है।
वहीं, पुलिस की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पार्षदों को किस मामले में और किस कानूनी आधार पर रोका गया। ऐसे में पूरे घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक पुलिस बयान का इंतजार है।
आज होना है चेयरमैन पद के लिए मतदान
तिजारा नगर परिषद में चेयरमैन पद के लिए सोमवार को मतदान होना है। मतदान से कुछ घंटे पहले 18 पार्षदों को रोके जाने की खबर ने राजस्थान और हरियाणा, दोनों जगह सियासी हलचल बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि हिरासत में लिए गए पार्षद मतदान में शामिल हो पाएंगे या नहीं।
राजस्थान के अन्य निकायों में भी चुनाव से पहले पार्षदों की गिरफ्तारी को लेकर हाईकोर्ट में देर रात सुनवाई हुई है। अदालत ने कुछ मामलों में अंतरिम राहत दी है, जबकि पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।



