MP : मैहर में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग, नाले का पानी पीने को मजबूर

मैहर: मध्य प्रदेश के मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में टेगना ररिया टोला में हालात इतने चिंताजनक हो चुके हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में नाली और गड्ढे में भरे गंदे पानी का इस्तेमाल पीने (Drinking) और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए करना पड़ रहा है. सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन (JJM) के तहत गांव में नल कनेक्शन लगाए गए हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इन नलों से नियमित रूप से पानी नहीं आ रहा. अचल साकेत ग्रामीण का कहना है कि कई दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह बाधित है. वहीं बस्ती में मौजूद एकमात्र हैंडपंप भी लंबे समय से खराब पड़ा है, जिसकी मरम्मत तक नहीं कराई गई. इस वजह से यहां पर रह रहे लोगों को नाले के पानी से ही अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है और इस पानी को पीकर ही यहां रहने वाले लोग अपनी प्यास बुझा रहे हैं. दो दर्जन परिवार दूषित पानी पर निर्भर है. पेयजल के किसी वैकल्पिक स्रोत के न होने के कारण टेगना ररिया टोला के करीब 20 से 25 परिवार नाली और गड्ढे में जमा गंदे पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं. यह पानी बदबूदार है और उसमें कीड़े-मकोड़े तक दिखाई देते हैं. इसके बावजूद मजबूरी में लोग इसी पानी को पी रहे हैं.
इस दूषित पानी के सेवन से डायरिया, उल्टी, बुखार, त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारी इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करते नजर आ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने की आशंका हर समय बनी रहती है. शिकायतों के बाद भी सुनवाई नहीं हुई. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत, जनपद और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी दी, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया. सिर्फ आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और ग्रामीण बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है.
मामले के तूल पकड़ने के बाद जल जीवन मिशन से जुड़ी एलएंडटी कंपनी के ऑपरेटर नरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले पांच दिनों से गांव में पानी की आपूर्ति ठप थी, जिस कारण ग्रामीणों को नाली का गंदा पानी पीना पड़ा. ऑपरेटर ने तकनीकी खराबी को कारण बताते हुए जल्द सुधार का दावा किया और नल चालू करने की प्रक्रिया शुरू की. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों को इस गंभीर समस्या की जानकारी थी तो समय रहते समाधान क्यों नहीं किया गया.
ये स्थिति सिर्फ टेगना ररिया टोला नहीं तक सीमित नहीं है. मैहर जिले के कई गांवों में जल जीवन मिशन की स्थिति इसी तरह बदहाल बताई जा रही है, जहां योजनाएं कागजों में सफल हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. ऐसे में अगर जल्द ही पेयजल व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त नहीं किया गया, हैंडपंपों की मरम्मत और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तो दूषित पानी किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा का कारण बन सकता है.



