फाजिल्का में जवानों की कलाई पर बंधेगी 1100 बहनों की राखी, 1971 के शहीदों को भी दी जाएगी श्रद्धांजलि

चंडीगढ़: रक्षाबंधन के पर्व पर इस बार बहनों का स्नेह देश की सरहद तक पहुंचेगा। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के फाजिल्का स्थित असफवाला वॉर मेमोरियल में 23 अगस्त को ‘राखी सरहद के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान फाजिल्का की 1100 महिलाएं अपने परिवारों के साथ पहुंचकर भारतीय सेना और बीएसएफ के 1100 जवानों की कलाई पर राखी बांधेंगी।
कार्यक्रम का पोस्टर मंगलवार को चंडीगढ़ में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने जारी किया। कार्यक्रम में करण गिल्होत्रा और नवदीप असीजा ने मेजबान की भूमिका निभाई। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन के जरिए सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों के प्रति सम्मान, विश्वास और कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी। कार्यक्रम का संदेश ‘राष्ट्र रक्षा का सम्मान… बहनों का अभिमान’ रखा गया है।
1971 के शहीदों को भी किया जाएगा नमन
असफवाला वॉर मेमोरियल में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि यह स्मारक 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान फाजिल्का सेक्टर की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 232 भारतीय सैनिकों की शहादत की याद दिलाता है।
ऐसे स्मारक स्थल पर जवानों को राखी बांधना देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का भी प्रतीक होगा। आयोजक नवदीप असीजा ने बताया कि कार्यक्रम के जरिए शहीद सैनिकों के बलिदान को भी नमन किया जाएगा।
सेना और बीएसएफ के जवानों के साथ शहीद परिवार भी होंगे शामिल
आयोजकों करण गिल्होत्रा, नवदीप असीजा और रमन खुराना के मुताबिक कार्यक्रम में सेवारत सेना और बीएसएफ के जवानों के अलावा पूर्व सैनिक, शहीद परिवार और उनके परिजन भी शामिल होंगे। इनके साथ नागरिकों, सामाजिक संगठनों, स्कूलों, धार्मिक संस्थाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रहेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया करेंगे। इस दौरान भारतीय सेना और बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
1100 बहनें, 1100 जवान और एक राखी का संदेश
रक्षाबंधन पर आमतौर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, लेकिन फाजिल्का में इस परंपरा को सीमा की रक्षा करने वाले सैनिकों से जोड़ा गया है। 1100 महिलाएं 1100 जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उनके प्रति सामूहिक आभार व्यक्त करेंगी।
आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम में देश की सुरक्षा के लिए जवानों के योगदान, शहीद परिवारों के त्याग और सीमा क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों की भावनाओं को भी सामने रखा जाएगा। उनका कहना है कि फाजिल्का से देशभक्ति और कृतज्ञता का यह संदेश पूरे देश तक पहुंचना चाहिए।



