
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को जगतार सिंह हवारा की पैरोल के मुद्दे को लेकर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की। हवारा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी है और फिलहाल दिल्ली की जेल में बंद है। पंजाब सरकार की ओर से हवारा को 10 दिन की पैरोल दिए जाने की मांग की गई है।
मां की तबीयत का हवाला देकर मांगी 10 दिन की पैरोल
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि जगतार सिंह हवारा की मां की तबीयत ठीक नहीं रहती और वह अपने बेटे से मिलना चाहती हैं। इसी मानवीय आधार को देखते हुए राज्य सरकार ने 10 दिन की पैरोल की मांग की है।
मान ने कहा कि पैरोल के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पैरोल की अवधि में किसी तरह की हुड़दंगबाजी या प्रदर्शन न हो।
अंतिम फैसला केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद
हवारा की पैरोल पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की ओर से लिया जाएगा। मुख्यमंत्री मान ने राज्यपाल से इस मामले में केंद्र सरकार से बातचीत करने का आग्रह किया। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मामले को लेकर केंद्र से बात करने का आश्वासन दिया है।
कौन है जगतार सिंह हवारा?
जगतार सिंह हवारा पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का रहने वाला है। उसका नाम वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में सामने आया था। इसी मामले से जुड़े लुधियाना के घंटाघर चौक बम धमाके में 24 लोग घायल हुए थे। पुलिस ने विनोद कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज किया था और 23 दिसंबर 1995 को हवारा को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने हवारा के अलावा बिक्रमजीत सिंह निवासी खुमानो, परमजीत सिंह भिओरा, बलविंदर सिंह निवासी रोपड़ और प्रीतम सिंह समेत अन्य लोगों को मामले में नामजद किया था। तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार की अदालत ने बिक्रमजीत सिंह को बरी कर दिया था, जबकि बलविंदर सिंह और प्रीतम सिंह को पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका था।
पुलिस ने बरामदगी का किया था दावा
पुलिस के मुताबिक जगतार सिंह हवारा से पूछताछ के दौरान कुन्दनपुरी क्षेत्र में बुड्ढे नाले के पास से 5 किलो आरडीएक्स, एक एके-56, 60 कारतूस, एक रिमोट कंट्रोल और एक वॉकी-टॉकी वायरलेस सेट बरामद किया गया था।
रिपोर्टों के अनुसार हवारा ने अन्य कैदियों के साथ मिलकर जेल के नीचे सुरंग बनाने की कोशिश भी की थी। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। फिलहाल उसकी पैरोल को लेकर फैसला केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।



