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यूपी में रंग दिखाएगा योगी का हिन्दुत्व और विकास का मॉडल

नौ साल के लंबे शासन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अगले साल चुनाव के कुरुक्षेत्र में उतरना है। चुनाव मैदान में सरकारी मशीनरी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। यूपी में 2014, 2017, 2019 और 2022 तक तमाम लोकसभा व विधानसभा में बड़ी सफलता हासिल कर बीजेपी ने पहले से ही विपक्ष पर लगातार दबाव बनाए रखा है। 2014 और उसके बाद के चुनावों में जितना मत प्रतिशत बीजेपी के पक्ष में था, 2024 में भी बीजेपी उतना वोट पाने में सफल रही है। लेकिन वोटों की र्शिंफ्टग और अति आत्मविश्वास ने बीजेपी की अपेक्षाओं को चोटिल किया। जो विपक्ष पहले हार मान के बैठ गया था, वो आज फिर से सक्रिय हो गया है। योगी साफ कह रहे हैं कि ‘किसी भी स्थिति में बैकफुट पर आने की आवश्यकता नहीं’ है। वैसे भी बीजेपी को बैकफुट पर जाने की ज़रूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के दावों के अनुसार रामराज भले न आया हो, लेकिन इस हकीकत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि प्रदेश की जनता योगी राज में भी काफी हद तक संतुष्ट नज़र आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज और कानून व्यवस्था की स्थिति अच्छी है। पूरी कोशिश है कि प्रदेश की जनता अपने आप को सुरक्षित और सहज महसूस करे। यह मशीनरी 2027 में तीसरी बार उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है।

साल के शुरू में ही राज्य में चुनावी माहौल गरमाने लगा है। 25 जनवरी को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उत्तर प्रदेश का अपना पहला दौरा किया। यूपी का चुनाव उनकी भी अग्नि परीक्षा है। वे मथुरा के मंदिर गए। नबीन ने योगी सरकार की प्रशंसा की और विपक्ष पर हमला बोलते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू करने का आह्वान किया। उनके आने से एक दिन पहले, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लखनऊ में ‘यूपी दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करने आए थे। शाह ने राज्य की जनता से सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी वंशवादी पार्टियों को नकारने और 2027 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार बीजेपी पर भरोसा जताने की अपील की। उत्तर प्रदेश सभी पार्टियों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी मैदान है, इसलिए इस तरह की प्रारंभिक लामबंदी के कई कारण हैं। राष्ट्रीय मुद्दों के अलावा, राज्य में स्थानीय राजनीतिक तनाव के भी कई मुद्दे हैं। हाल ही में भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक विवादों में घिर गई, जिसके बाद नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को भविष्य में जाति आधारित बैठकें न करने की सलाह देते हुए नोटिस जारी करना पड़ा। इसके कुछ ही समय बाद, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा एक विवाद सामने आया, जो धार्मिक नेता और राज्य सरकार के बीच टकराव में बदल गया। सरकारी मशीनरी इस विवाद को जल्द से जल्द खत्म करने में जुट गई। कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकने के मकसद से बनाए गए यूजीसी के नए नियमों के विरोध में राज्य के विभिन्न हिस्सों से प्रदर्शन की खबरें आई हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से उच्च जाति के समूहों ने किया। मामला संवेदनशील था इसलिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन देते हुए कहा कि किसी भी समुदाय के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सभी को अभी से सक्रिय होना होगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा सांसद के साथ ही विधायकगण, एमएलसी, जिला पंचायत अध्यक्ष, महापौर, ब्लॉक प्रमुख, चेयरमैन और पार्षद सभी लोग आज से ही 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाएं। हमें एक बार फिर प्रदेश में भाजपा का परचम लहराना है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर सुपर एक्टिव होना होगा और किसी भी प्रकार की अफवाहों का तत्काल खंडन करना होगा। योगी आदित्यनाथ अपने एजेंडे पर काम कर रहे हैं। योगी ने अपने नौ वर्ष के शासनकाल में विकास और्र ंहदुत्व को जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो न केवल उत्तर प्रदेश को आर्थिक पटरी पर ले आया, बल्कि उसने सांस्कृतिक गौरव को भी नई ऊंचाई दी। जीरो टॉलरेंस की उनकी अपराध विरोधी नीति से राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत हुई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। पिछले चार सालों में सात लाख से अधिक सरकारी नौकरियां पैदा हुईं, हर जिले में मेडिकल कॉलेज बने, और गरीबों को मुफ्त राशन पहुंचाया गयार्। हिंदुत्व के मोर्चे पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे कार्यों ने करोड़ों लोगों की आस्था को मजबूत किया।

2017 में योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही अपराध पर जीरो टॉलरेंस का नारा दिया। माफियाराज खत्म करने के लिए सैकड़ों एनकाउंटर हुए, पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम सात शहरों में लागू किया गया। साइबर क्राइम थाने खोले गए और धर्मांतरण विरोधी कानून लाकर सामाजिक सद्भाव बनाए रखा। विकास के मोर्चे पर उन्होंर्ने ंसगर्ल ंवडो सिस्टम से निवेश आकर्षित किया, दस हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स ग्राउंड ब्र्रेंकग हुए। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए गन्ना भुगतान समय पर किया, सोलर पंप वितरित किए, और कृषि विकास दर तेरह प्रतिशत पहुंचाईर्। हिंदुत्व को विकास से जोड़ते हुए उन्होंने कहा र्कि हिंदुत्व ही विकास है, जो राष्ट्र को मजबूत बनाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में योगी सरकार ने चमत्कारिक काम किया। मेट्रो सेवाएं नोएडा, लखनऊ, कानपुर, आगरा जैसे शहरों में फैलीं। एयरपोट्र्स का विस्तार हुआ, हेलीपोर्ट सेवाएं आगरा, मथुरा, प्रयागराज में शुरू कीं। शहरीकरण को व्यवस्थित करने के लिए राज्य राजधानी क्षेत्र और वाराणर्सी ंवध्य इकोनॉमिक जोन बनाए। ग्रामीण विकास को गति देने के लिए सड़क, बिजली, पानी की योजनाओं को तेजी से अंजाम दिया गया। बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च का ऐलान हुआ, जिसमें सात रेल कॉरिडोर शामिल हैं। अयोध्या के दीपोत्सव में लाखों दीप जलाकर पर्यटन को बढ़ावा दिया गया। इससे राज्य में छह करोड़ से अधिक पर्यटक आए, विदेशी पर्यटक चौदह लाख के पार पहुंचे। स्वास्थ्य और शिक्षा में क्रांति लाई गई।

एक जिला एक मेडिकल कॉलेज योजना से हर जिले में डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। आयुष्मान भारत से करोड़ों गरीबों को मुफ्त इलाज मिला। वहीं स्कूल चलो अभियान से बच्चों का दाखिला बढ़ा। रोजगार के लिए स्टार्टअप पॉलिसी लाई गई और युवाओं को सात लाख नौकरियां दी गईं। पर्यटन परिपथ विकसित किए गए, जैसे रामायण, कृष्ण, बौद्ध परिपथ। रोपवे प्रोजेक्ट्स चित्रकूट, बरसाना में शुरू हुए। हिंदुत्व विकास का विश्लेषण करें तो प्रयागराज महाकुंभ इसका जीता जागता उदाहरण है। 2025 के कुंभ में छह करोड़ श्रद्धालु आए, संगम को विश्व स्तरीय बनाया गया। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई, रोजगार बढ़ा। तीर्थ विकास परिषदों का गठन अयोध्या, काशीर्, विंध्य धाम, चित्रकूट, नैमिषारण्य के लिए किया गया। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर से वाराणसी की सांस्कृतिक धरोहर चमकी। अन्नपूर्णा मंदिर में प्रतिमा स्थापित की गई। ब्रज रंगोत्सव, देव दीपावली र्ने हिंदू संस्कृति को जीवंत किया।

अर्थव्यवस्था की बात करें तो उत्तर प्रदेश अब ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर अग्रसर है। मंत्रियों को पांच गुना ज्यादा प्रोजेक्ट मंजूरी का अधिकार दिया गया। वहीं औद्योगिक क्लस्टर्स में पांच हजार करोड़ निवेश से सड़कें मजबूत होंगी। योगी र्का हिंदुत्व विकास का फॉर्मूला विपक्ष को चुनौती दे रहा है। उनकी नीतियां दलितों को भी लाभ पहुंचा रही। निवेश सम्मेलनों से अरबों डॉलर आए। उदाहरण स्वरूप, नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स हब बना। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा ने भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया। योगी ने अपने दूसरे कार्यकाल के चार सालों में पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। दुधवा नेशनल पार्क के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की। सोलर एनर्जी से किसानों को लाभ मिला। जीडीपी ग्रोथ रेट राष्ट्रीय औसत से ऊपर पहुंच गईर्। हिंदुत्व का एक और उदाहरण फैजाबाद को अयोध्या और इलाहाबाद को प्रयागराज नाम देना है। इससे सांस्कृतिक पहचान लौटी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्तिर्, पिंकक बूथ आदि बनाए गए। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को मजबूत किया गया। स्टेम संस्थान, गल्र्स हॉस्टल बनेर्। हिंदूदुत्व और विकास का संतुलन देखें तो अयोध्या में 350 करोड़ की योजनाएं इसका प्रमाण हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में योगी इसी फॉर्मूले पर दांव खेल रहे। विपक्ष के हमलों का जवाब विकास के आंकड़ों से देंगे। महाकुंभ, राम मंदिर, निवेश, नौकरियां सब उनके हथियार हैं। उत्तर प्रदेश बदला है, गरीबी से उभरकर विकासशील राज्य बना। भाजपा कार्यकर्ता उत्साहित हैं, वहीं योगी चुनावों में तीसरी बार परीक्षा देंगेर्। ंहदुत्व की लहर और विकास की गति से जीत का भरोसा है। कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ ने अपने 9 साल के दो कार्यकाल में पूरी तरह से यह साबित किया र्कि हिंदुत्व और विकास पर्यायवाची हैं।

अब बस जीत का एजेंडा
इतना सब करने के बाद भी उनकी सरकार और पार्टी के भीतर कुछ बड़े नेताओं के साथ आपसी टकराव की खबरें भी आती रही हैं। खासकर, योगी आदित्यनाथ और उनके उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मनमुटाव की खबरें तो 2017 से ही सामने आ रही हैं। लेकिन चुनाव पूर्व साल में हाईकमान के साफ निर्देश हैं कि अब आपसी मतभेदों को भूलकर केवल चुनाव के एजेंडे पर काम हो क्योंकि केंद्र की कुर्सी का भविष्य यूपी की सत्ता की कुर्सी से जुड़ा है। बीते दिनों प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच बढ़ा विवाद अब यूपी की सियासत का बड़ा मुद्दा बन गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमी’ वाले बयान के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का संतों के प्रति नरम और सम्मानजनक रुख सामने आया। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इशारे में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तुलना ‘कालनेमी’ से कर दी। ‘कालनेमि’ रामचरितमानस के पात्र हैं। पौराणिक कथाओं में कालनेमि वह राक्षस था जिसने साधु का वेश धरकर हनुमान जी का रास्ता रोकने की कोशिश की थी। सीएम योगी माघ मेले को एक ‘यज्ञ’ के समान मानते हैं। उनके इस बयान को इस संदर्भ में देखा जा रहा था। कांग्रेस खेमे के माने जाने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए यह आपत्तिजनक था।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा शंकराचार्य को ‘पूज्य संत’ बताकर उनके चरण स्पर्श की बात करने से सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई। दोनों बयानों ने यह सवाल खड़ा कर दिया मौर्य-योगी फिर आमने सामने आ गए। सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि यह दोनों का पुराना मतभेद है या बीजेपी की कोई सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल मतभेद नहीं, बल्कि अगले साल चुनाव को देखते हुए बीजेपी और संघ परिवार की ‘ट्रैक-2 डिप्लोमेसी’ हो सकती है। केशव मौर्य विश्र्व हिंदू परिषद की पृष्ठभूमि से आते हैं और संतों के बीच उनकी गहरी पैठ मानी जाती है। ऐसे में जब प्रशासन और मुख्यमंत्री झुकने को तैयार नहीं हैं, तब मौर्य के जरिए संतों के गुस्से को शांत करने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है।

बजट के तोहफे
चुनाव पूर्व वर्ष के केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूप में कृपा बरसी है। मोदी सरकार के खजाने से योगी सरकार की तिजोरी में लगभग 4.26 लाख करोड़ रुपये आएंगे। अलग-अलग मदों के रूप में राज्य सरकार को मिलने वाली ये धनराशि पिछले बजट की तुलना में 25 हजार करोड़ रुपये ज्यादा है। इसमें केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, कैपिटल असिस्टेंस, केंद्र प्रायोजित योजनाओं में हिस्सेदारी, सेंट्रल सेक्टर और वित्त आयोग के तहत मिलने वाली धनराशि शामिल है। इसी तरह 16वें वित्त आयोग की सिफारिश पर केंद्रीय करों में उत्तराखंड की हिस्सेदारी बढ़ी है। इससे राज्य को 1841 करोड़ की अतिरिक्त राशि मिलेगी। हिस्सेदारी में केंद्र सरकार से इस वित्तीय वर्ष में 17,414 करोड़ मिलेंगे। बजट में उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ाने के लिए कई बड़े और महत्वाकांक्षी प्रस्तावों की घोषणा की गई है। बजट में उत्तराखंड में पर्यटन, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में विकास को एक बड़ा फायदा़ मिलेगा। केंद्रीय बजट में घोषित 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से 2 महत्वपूर्ण कॉरिडोर सीधे उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं, जिनमें दिल्लीझ्रवाराणसी और वाराणसीझ्रसिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रमुख हैं। खेल सामग्री निर्माण को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्रोत्साहन दिए जाने से उत्तर प्रदेश के मेरठ, नोएडा और आगरा जैसे परंपरागत खेल उद्योग के गढ़ों को नई ऊर्जा मिलेगी। मेरठ पहले से ही देश का प्रमुख स्पोट्र्स गुड्स हब है, जहां क्रिकेट, एथलेटिक्स और फिटनेस से जुड़ी सामग्री का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।

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