हरिद्वार : हरिद्वार में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेला-2027 को इस बार नई ऐतिहासिक पहचान देने की तैयारी है। पहली बार प्रयागराज की तर्ज पर यहां धर्मध्वजा स्थापना, भव्य पेशवाई और तीन अमृत स्नान (शाही स्नान) आयोजित किए जाएंगे। अखाड़ों ने भूमि आवंटन, छावनी स्थापना और व्यवस्थाओं को शीघ्र अंतिम रूप देने की मांग की है, ताकि वे समय रहते परंपरागत तैयारियां पूरी कर सकें। मेला प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि भूमि आवंटन की रूपरेखा एक माह में अंतिम कर दी जाएगी।
अखाड़ों की मांग: सेक्टर निर्धारण और समय पर भूमि आवंटन
मेला नियंत्रण कक्ष में हुई बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि सभी अखाड़े अर्धकुंभ-2027 को दिव्य और भव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमृत स्नान पर्वों पर परंपरागत भव्य पेशवाई निकाली जाएगी। उन्होंने चंडीघाट से श्यामपुर और गौरीशंकर द्वीप क्षेत्र तक की भूमि चिह्नित कर पूरे मेला क्षेत्र को सेक्टरों में विभाजित करने की मांग उठाई, ताकि छावनियों की स्थापना, धर्मध्वजा आरोहण और अन्य अनुष्ठान सुव्यवस्थित ढंग से हो सकें।
प्रशासन का भरोसा: धार्मिक गरिमा के अनुरूप होंगी व्यवस्थाएं
बैठक में श्री जूना अखाड़ा के श्रीमहंत हरि गिरी ने शासन-प्रशासन की तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि संत समाज की सहमति से ही अर्धकुंभ को ऐतिहासिक स्वरूप दिया जाएगा। मेला अधिकारी सोनिका ने भरोसा दिलाया कि साधु-संतों और श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे और भूमि आवंटन की प्रक्रिया तय समय में पूरी होगी।
महाशिवरात्रि और सोमवती अमावस्या के बीच एक दिन का अंतर, बढ़ी चुनौती
अर्धकुंभ-2027 में महाशिवरात्रि, सोमवती अमावस्या और वैशाखी पर तीन अमृत स्नान होंगे, जबकि मेले के दौरान सात पर्व स्नान भी आयोजित किए जाएंगे। 6 मार्च 2027 को महाशिवरात्रि पर पहला अमृत स्नान और 8 मार्च 2027 को सोमवती अमावस्या का स्नान निर्धारित है। दोनों प्रमुख स्नानों के बीच केवल एक दिन का अंतर प्रशासन और अखाड़ों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इस पर बैठक में चर्चा हुई और सरकार व अखाड़ों की सहमति से आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बैठक में पांच अखाड़ों की मौजूदगी, सूचना पर उठे सवाल
बैठक में पांच अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल हुए। श्री पंच अग्नि अखाड़ा के श्रीमहंत साधनानंद गिरी ने कहा कि बैठक की सूचना समय से नहीं दी गई। उनका कहना था कि इस स्तर की बैठकों की जानकारी कम से कम पांच दिन पहले दी जानी चाहिए थी, ताकि सभी अखाड़े तैयारी के साथ भाग ले सकें।
अर्धकुंभ-2027 को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए प्रशासन और संत समाज के बीच समन्वय की प्रक्रिया जारी है। आने वाले महीनों में भूमि आवंटन और सेक्टर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तैयारियां और रफ्तार पकड़ेंगी।




