पंजाब में एनकाउंटर पर हाईकोर्ट सख्त: डीजीपी गौरव यादव गुरदासपुर मामले में पेश होंगे

चंडीगढ़। पंजाब में पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर और हिरासत में हुई मौतों के मामलों की सीबीआई जांच को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरदासपुर में पुलिस एनकाउंटर में युवक की मौत को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है।
मामले का विवरण:
- गुरदासपुर के आदियां पुलिस चौकी में 22 फरवरी को दो पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी रणजीत सिंह को 25 फरवरी को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया।
- पुलिस का कहना है कि रणजीत सिंह हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था और उसने फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई।
- परिवार ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए न्याय की मांग की थी।
हाईकोर्ट की कार्रवाई:
- डीजीपी गौरव यादव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया गया है।
- अदालत ने अन्य चर्चित मामलों जैसे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल इंटरव्यू से जुड़े मामले पर भी जवाब तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
- यह दूसरी बार है जब हाईकोर्ट ने पंजाब में किसी चर्चित आपराधिक मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। पहले मोहाली में कबड्डी प्रमोटर राणा बलाचौरिया हत्याकांड में भी ऐसा हुआ था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
कांग्रेस नेता सुखपाल खैरा ने रणजीत सिंह की एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग पर हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह पंजाब सरकार के तहत अब तक हुए 42वें कथित फेक एनकाउंटर के संदर्भ में न्याय सुनिश्चित करने का मौका है। खैरा ने सीबीआई जांच के तहत दोषी अधिकारियों और प्रभावशाली नेताओं को सजा देने की मांग की।
पुलिस का आरोप:
- घटना में शामिल तीन युवकों को लगभग 20,000 रुपये देने का लालच दिया गया था।
- मुख्य आरोपी रणजीत सिंह आदियां गांव का रहने वाला था।
- अन्य आरोपी दिलावर सिंह और इंदरजीत सिंह को पहले गिरफ्तार किया गया।
हाईकोर्ट की सख्ती से पंजाब पुलिस और राज्य सरकार पर जांच में निष्पक्षता बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है।



