कांगो में इबोला का कहर, 65 मौतों के बाद अलर्ट; जानिए कितना घातक और तेजी से फैलने वाला है यह वायरस

किंशासा: अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस के नए प्रकोप ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। देश के इटुरी प्रांत में अब तक 246 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 65 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, इनमें से चार मौतों की ही प्रयोगशाला में पुष्टि हुई है और बाकी मामलों की जांच जारी है। अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने इस प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे कांगो में इबोला का 17वां बड़ा प्रकोप बताया है।
यह संक्रमण मुख्य रूप से इटुरी प्रांत के मोंगवालु और रवामपारा स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैला है। कुछ मामले प्रांतीय राजधानी बुनिया में भी सामने आए हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह इलाका युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमाओं के बेहद करीब स्थित है, जिससे संक्रमण के दूसरे देशों में फैलने का खतरा बढ़ गया है।
खराब हालात और विस्थापन से बढ़ी मुश्किलें
इटुरी क्षेत्र कांगो के पूर्वी हिस्से में स्थित एक दूरदराज इलाका है, जो राजधानी किंशासा से करीब एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी पर है। यहां खराब सड़कें और सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं राहत कार्यों में बड़ी बाधा बन रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में हिंसा और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों के कारण हजारों लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे संक्रमित लोगों के संपर्कों का पता लगाना और संक्रमण पर नियंत्रण करना मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह प्रकोप इबोला वायरस के ज़ैरे स्ट्रेन से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए जीन सीक्वेंसिंग की प्रक्रिया जारी है।
युगांडा में भी मिला संक्रमण का मामला
इसी बीच युगांडा में भी इबोला संक्रमण का एक मामला सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, कांगो से जुड़े एक व्यक्ति की मौत के बाद जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। युगांडा सरकार ने इसे ‘आयातित मामला’ बताया है और कहा है कि फिलहाल स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलने के संकेत नहीं मिले हैं। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए सभी लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपात बैठक की है, जिसमें संक्रमण को रोकने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
पहले भी भारी तबाही मचा चुका है इबोला
कांगो में इबोला वायरस पहले भी भारी तबाही मचा चुका है। वर्ष 2018 से 2020 के बीच फैले इबोला प्रकोप में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इबोला वायरस के मुख्य रूप से तीन प्रकार माने जाते हैं— इबोला वायरस, सूडान वायरस और बुंडीबुग्यो वायरस। हालांकि, उपलब्ध वैक्सीन हर प्रकार के वायरस पर समान रूप से प्रभावी नहीं होती, इसलिए वायरस के प्रकार की पुष्टि बेहद जरूरी मानी जा रही है।
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
इबोला एक अत्यंत खतरनाक और जानलेवा वायरस माना जाता है। यह सबसे पहले संक्रमित जंगली जानवरों से इंसानों में फैलता है और फिर इंसानों के बीच शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, पसीना और अन्य स्राव के संपर्क से तेजी से फैलता है। संक्रमित कपड़े, बिस्तर और अन्य वस्तुएं भी संक्रमण का कारण बन सकती हैं।
इसके लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त, शरीर में दर्द और कई मामलों में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव शामिल होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।



