नेपाल-बिहार की गाड़ियों से बढ़ी पेट्रोल-डीजल की मांग, बॉर्डर जिलों के पंपों पर लंबी कतारें; खपत में 20% तक उछाल

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में पेट्रोल-डीजल की मांग अचानक बढ़ने से पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया है। गोरखपुर समेत आसपास के इलाकों में पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कई जगहों पर ईंधन की कमी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, नेपाल और बिहार से आने वाली गाड़ियों की वजह से स्थानीय खपत में तेज उछाल दर्ज किया जा रहा है।
पेट्रोल पंप संचालक यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि नेपाल और भारत के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़े अंतर के चलते बाहरी वाहनों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे टंकियां तेजी से खाली हो रही हैं और मांग असामान्य रूप से बढ़ गई है।
खपत में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज
आंकड़ों के अनुसार, गोरखपुर मंडल में फरवरी की तुलना में मार्च, अप्रैल और मई के दौरान पेट्रोल-डीजल की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल की खपत में हजारों किलोलीटर की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि डीजल की बिक्री में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी की तुलना में अप्रैल में पेट्रोल की बिक्री में 1007 किलोलीटर और डीजल में 4160 किलोलीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं मार्च में भी 1500 किलोलीटर से अधिक पेट्रोल की अतिरिक्त बिक्री हुई। कुल मिलाकर पिछले तीन महीनों में 10 से 20 प्रतिशत तक खपत बढ़ी है।
नेपाल और बिहार के बीच कीमत का अंतर बना कारण
जानकारी के अनुसार, नेपाल में डीजल-पेट्रोल की कीमत भारत की तुलना में काफी अधिक है, जिससे वहां से आने वाले वाहन भारतीय पंपों पर ईंधन भरवा रहे हैं। वहीं बिहार में भी टैक्स और सेस के चलते कीमतें यूपी की तुलना में करीब 10 रुपये प्रति लीटर अधिक बताई जा रही हैं।
इसके चलते नेपाल और बिहार जाने वाले वाहन यूपी के सीमावर्ती जिलों—गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज—में ही टैंक फुल करवा रहे हैं। खासकर कुशीनगर और देवरिया बॉर्डर पर स्थित पंपों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा जा रहा है।
सीमा क्षेत्रों से रोज हजारों वाहन कर रहे आवाजाही
सोनौली और ठूठीबारी बॉर्डर से प्रतिदिन सैकड़ों मालवाहक वाहन, बसें और छोटी गाड़ियां नेपाल में प्रवेश करती हैं। इसी तरह कुशीनगर के सलेमगढ़ बॉर्डर से हजारों वाहन बिहार में जाते हैं। यही वजह है कि बॉर्डर जिलों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगातार बनी हुई है।
ड्राई पंपों पर आपूर्ति के निर्देश, जांच टीम गठित
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पेट्रोल पंपों की निगरानी तेज कर दी है। जिला पूर्ति अधिकारी की ओर से 20 सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो लगातार पंपों का निरीक्षण कर रही है। जहां भी पंप खाली पाए जा रहे हैं, वहां तुरंत आपूर्ति के निर्देश दिए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के 3 से 4 घंटे के भीतर संबंधित पंपों पर ईंधन पहुंचाया जा रहा है, ताकि सप्लाई बाधित न हो।
कालाबाजारी और तस्करी पर भी सवाल
इस बीच सीमावर्ती इलाकों में पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी और अवैध तस्करी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। हाल ही में कुशीनगर में एक मोबाइल टैंकर से करीब 3000 लीटर अवैध ईंधन बरामद किया गया था।
स्थानीय पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि कुछ लोग गैलन में ईंधन लेने के दौरान विवाद और मारपीट तक पर उतर आते हैं। ऐसे में निगरानी और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
पंप संचालकों ने उठाए आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल
पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन का कहना है कि पंपों की संख्या बढ़ने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। कंपनियों द्वारा जिलेवार सप्लाई का स्पष्ट आंकड़ा न देने से स्थिति और जटिल हो रही है।



