
अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस, साइबर क्राइम और सड़क सुरक्षा पर फोकस: यूपी के नए डीजीपी राजीव कृष्ण ने पहली बार खोले बड़े एजेंडे
लखनऊ: उत्तर प्रदेश को लंबे इंतजार के बाद पूर्णकालिक पुलिस प्रमुख मिल गया है। करीब चार साल की प्रतीक्षा के बाद कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे आईपीएस राजीव कृष्ण को अब राज्य का स्थायी डीजीपी नियुक्त किया गया है। नियुक्ति के बाद उन्होंने ‘आज तक’ से खास बातचीत में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, साइबर सुरक्षा और पुलिस सुधारों को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को विस्तार से साझा किया।
जीरो टॉलरेंस नीति रहेगी जारी
डीजीपी राजीव कृष्ण ने स्पष्ट कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा पिछले आठ से नौ वर्षों में अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि पुलिसिंग की कार्यप्रणाली में आया एक ठोस बदलाव है, जिसके तहत छोटी से छोटी घटना पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। उनका कहना है कि पुलिस का उद्देश्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराधियों को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सजा तक पहुंचाना है।
कानून-व्यवस्था और जनता की सुरक्षा प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि किसी भी अपराध को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और पुलिस की प्राथमिकता जनता में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना है। साथ ही अपराधियों में कानून का भय बनाए रखना भी जरूरी है। डीजीपी के अनुसार, प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है, ताकि नागरिकों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
सड़क सुरक्षा और ‘जीरो फेटेलिटी प्रोग्राम’ पर जोर
सड़क दुर्घटनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि लापरवाही, वाहनों की खराब स्थिति और सड़क इंजीनियरिंग की कमियों के कारण बड़ी संख्या में हादसे होते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए प्रदेश में ‘जीरो फेटेलिटी प्रोग्राम’ लागू किया गया है। डीजीपी ने बताया कि पिछले चार महीनों में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में कमी दर्ज की गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
एनकाउंटर पर पुलिस का पक्ष
एनकाउंटर को लेकर उठने वाले सवालों पर उन्होंने कहा कि यह शब्द मीडिया द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस की पहली प्राथमिकता हमेशा गिरफ्तारी होती है। लेकिन कई बार अपराधी गिरफ्तारी से बचने के लिए हमला करते हैं या भागने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस को आत्मरक्षा में कानून के तहत कार्रवाई करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि साल भर में लाखों गिरफ्तारियां होती हैं, जबकि मुठभेड़ों में होने वाली घटनाएं बेहद सीमित होती हैं।
साइबर अपराध पर बढ़ती चुनौती और पुलिस की तैयारी
साइबर अपराध को लेकर डीजीपी ने कहा कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ ऑनलाइन ठगी और साइबर क्राइम के मामले भी बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि यूपीआई और क्यूआर कोड जैसे डिजिटल माध्यमों ने भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व इसका दुरुपयोग कर रहे हैं।
साइबर सुरक्षा में यूपी पुलिस की रणनीति
उन्होंने बताया कि प्रदेश में थाना स्तर तक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि साइबर अपराध नियंत्रण और पीड़ित सहायता के मामले में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
डार्क वेब और तकनीकी अपराधों पर नजर
राजीव कृष्ण ने कहा कि अपराधी लगातार ऐसे माध्यमों की तलाश में रहते हैं, जहां वे अपनी पहचान छिपाकर अवैध गतिविधियां कर सकें। डार्क वेब भी इसी का हिस्सा है, जिसका उपयोग कुछ आतंकवादी और साइबर अपराधी तत्व करते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ा रही है और कई मामलों में सफलता भी मिली है।
सोशल मीडिया अनुशासन और पुलिस सुधार
डीजीपी ने सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर कहा कि विभाग की नीति स्पष्ट है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि वर्दी केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारियां भी बढ़ाती हैं, इसलिए सभी को अनुशासन और नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
भविष्य की दिशा और प्राथमिकताएं
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार की जो प्राथमिकताएं पहले से लागू की जा रही थीं, उन्हें अब और मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रदेश में पुलिस व्यवस्था अधिक प्रभावी, संवेदनशील और जनहितकारी बन सके।



