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राज्यसभा चुनाव 2026: NDA की नजर 150 के आंकड़े पर, कई राज्यों में कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती

नई दिल्ली: राज्यसभा की 27 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक हालात और संभावित क्रॉस-वोटिंग की चर्चाओं ने इस चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।

संसद के उच्च सदन में अपनी स्थिति मजबूत करने के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) रणनीतिक तैयारी कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा अनुमान सही साबित होते हैं तो एनडीए राज्यसभा में 150 के आंकड़े के करीब पहुंच सकता है या उसे पार भी कर सकता है। इससे उच्च सदन में सरकार की ताकत और प्रभाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए अहम परीक्षा

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में दिखाई देती है, लेकिन संभावित क्रॉस-वोटिंग की आशंका पार्टी की चिंता बढ़ा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है। वहीं भारतीय जनता पार्टी दो सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और अपने संख्याबल के आधार पर बढ़त बनाए हुए है।

कर्नाटक में कांग्रेस मजबूत, राजस्थान में भाजपा को बढ़त की उम्मीद

कर्नाटक में विधानसभा में बहुमत के कारण कांग्रेस अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में मानी जा रही है। मौजूदा समीकरणों के अनुसार पार्टी तीन सीटों पर बढ़त बनाए हुए दिखाई देती है।

वहीं राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला संख्या बल के आधार पर तय होता नजर आ रहा है। राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा को यहां बढ़त मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

गुजरात में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती

गुजरात में कांग्रेस की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही है। विधानसभा में सीमित विधायकों के कारण पार्टी के लिए राज्यसभा सीट जीतना आसान नहीं दिख रहा।

यदि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो लंबे समय बाद ऐसी स्थिति बन सकती है, जब गुजरात से कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि राज्यसभा में न पहुंचे। यह पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

उपचुनावों पर भी टिकी राजनीतिक नजरें

मुख्य चुनावों के साथ कुछ राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव भी प्रस्तावित हैं। विभिन्न कारणों से रिक्त हुई इन सीटों पर भी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।

इन सीटों पर उम्मीदवार चयन, क्षेत्रीय समीकरण और गठबंधन की रणनीति चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में राजनीतिक दल हर सीट पर सावधानीपूर्वक गणित बैठाने में जुटे हैं।

18 जून को होगी तस्वीर साफ

राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उम्मीदवारों की घोषणा, दलों की रणनीति और संभावित क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं।

आने वाले दिनों में नामांकन और उम्मीदवारों की सूची सामने आने के साथ चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल सभी की नजरें 18 जून को होने वाले मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हुई हैं, जो उच्च सदन के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

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