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मध्य प्रदेश में जल्द लागू हो सकती है समान नागरिक संहिता, सीएम मोहन यादव ने दिए संकेत

भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जल्द ही यूसीसी लागू की जाएगी और इसके लिए उच्चस्तरीय समिति विभिन्न वर्गों से सुझाव एकत्र कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजातीय समुदायों के पारंपरिक रीति-रिवाजों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून की अवधारणा राष्ट्रीय एकता की भावना से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में यूसीसी लागू हो चुकी है और मध्य प्रदेश भी इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनी समिति

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी के विभिन्न पहलुओं पर सुझाव और राय प्राप्त करने के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति जिला स्तर पर विभिन्न वर्गों से संवाद कर उनकी राय एकत्रित कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार खुले विचार और सभी वर्गों की सहभागिता के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।

जनजातीय समुदायों को मिलेगा विशेष प्रावधान

डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के जनजातीय समुदायों को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं के अनुरूप विशेष छूट दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने के बावजूद आदिवासी समाज अपनी परंपराओं का पालन कर सकेगा।

ईवी से यात्रा करेंगे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि अब वे अपनी यात्राएं इलेक्ट्रिक वाहन से ही करेंगे।

उनके अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन ईंधन संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

निवेश और रोजगार पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दे रही है। उनके मुताबिक पिछले वर्ष प्रदेश में करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जबकि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में 30 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे।

उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित निवेश का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अब धरातल पर दिखाई देने लगा है और प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

दो वर्षों में शुरू हुए सात नए मेडिकल कॉलेज

शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है और इनमें से सात नए मेडिकल कॉलेज पिछले दो वर्षों के दौरान शुरू किए गए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में तीन नए शासकीय विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं और सभी 55 जिलों में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय की पढ़ाई भी शुरू की गई है।

उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए नई पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने उद्योग आधारित 18 नई नीतियां लागू की हैं, जिसके परिणामस्वरूप बड़े उद्योगों, लघु उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र में निवेश बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि अब तक औद्योगिक परियोजनाओं के माध्यम से दो लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।

सरकार रोजगार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रति श्रमिक 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक आर्थिक सहायता 10 वर्षों तक उपलब्ध कराने की योजना भी लागू कर रही है।

लाड़ली बहना योजना का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संचालित लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को अब तक 36 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता लाभार्थियों को प्रदान की जा चुकी है।

विकसित मध्य प्रदेश 2047 का लक्ष्य

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, उद्योग, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास के क्षेत्र में राज्य को अग्रणी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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