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अमेरिका में भारतीयों का डंका! 96 यूनिकॉर्न कंपनियों के पीछे भारतीय दिमाग, स्टार्टअप दुनिया में सबसे बड़ा दबदबा

वॉशिंगटन : अमेरिका की अरबों डॉलर मूल्य वाली स्टार्टअप कंपनियों में भारतीय मूल के उद्यमियों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मूल के कारोबारी अमेरिकी यूनिकॉर्न कंपनियों के संस्थापकों में सबसे बड़े प्रवासी समूह के रूप में उभरे हैं। यह उपलब्धि वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारतीय प्रतिभा की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।

अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संस्था नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिका की 96 यूनिकॉर्न कंपनियों की स्थापना या सह-स्थापना भारतीय मूल के उद्यमियों ने की है। यूनिकॉर्न उन निजी स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है जिनका मूल्यांकन एक अरब डॉलर या उससे अधिक होता है।

96 यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मूल के उद्यमी अमेरिका में यूनिकॉर्न कंपनियों के संस्थापकों की सूची में शीर्ष स्थान पर हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र की चर्चित कंपनी पर्प्लेक्सिटी एआई भी शामिल है, जिसके सह-संस्थापक अरविंद श्रीनिवास हैं। करीब 20 अरब डॉलर के मूल्यांकन वाली यह कंपनी दुनिया की तेजी से बढ़ती एआई कंपनियों में गिनी जा रही है।

दूसरे देशों को पीछे छोड़ भारत सबसे आगे

प्रवासी संस्थापकों के मूल देशों की सूची में भारत 96 कंपनियों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद इस्राइल 60, यूनाइटेड किंगडम 47, चीन 41, कनाडा 30, रूस 23, फ्रांस 21, जर्मनी 18 और यूक्रेन 16 यूनिकॉर्न कंपनियों के साथ सूची में शामिल हैं।

रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका की 775 निजी यूनिकॉर्न कंपनियों में से 455 कंपनियों की स्थापना या सह-स्थापना प्रवासियों ने की है। यह कुल यूनिकॉर्न कंपनियों का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा है।

हजारों नौकरियां देने में भी बड़ी भूमिका

अध्ययन में यह भी सामने आया कि प्रवासी संस्थापकों द्वारा स्थापित अरबों डॉलर मूल्य की कंपनियों ने बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। औसतन प्रत्येक ऐसी कंपनी ने करीब 833 लोगों को रोजगार दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 66 प्रतिशत अमेरिकी यूनिकॉर्न कंपनियों की स्थापना या तो प्रवासियों ने की है या फिर उनके बच्चों ने। वहीं करीब 80 प्रतिशत यूनिकॉर्न कंपनियों में किसी न किसी प्रमुख नेतृत्व पद पर प्रवासी पृष्ठभूमि के लोग मौजूद हैं।

भारतीय मूल के कई नाम प्रतिष्ठित सूची में शामिल

रिपोर्ट में उन उद्यमियों का भी जिक्र किया गया है जिन्होंने दो या उससे अधिक यूनिकॉर्न कंपनियों की स्थापना की है। इस सूची में भारतीय मूल के मोहित अरोन, ज्योति बंसल, आशुतोष गर्ग, अरविंद जैन, सचिन नय्यर और अजीत सिंह जैसे नाम शामिल हैं।

इन उद्यमियों ने अमेरिका के तकनीकी और स्टार्टअप क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देकर भारतीय समुदाय की पहचान को और मजबूत किया है।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों का भी बड़ा योगदान

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की 183 अरब डॉलर मूल्य वाली कंपनियों की स्थापना ऐसे उद्यमियों ने की, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रूप में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उच्च शिक्षा और नवाचार का मेल वैश्विक स्तर पर नई कारोबारी सफलताओं को जन्म दे रहा है।

5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का संयुक्त मूल्यांकन

NFAP की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवासी संस्थापकों द्वारा स्थापित 455 यूनिकॉर्न कंपनियों का कुल संयुक्त मूल्यांकन लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सकल घरेलू उत्पाद के बराबर माना जाता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रवासी संस्थापकों वाली कई कंपनियां आज वैश्विक तकनीकी और नवाचार क्षेत्र की अगुआ बन चुकी हैं। इनमें अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्तीय प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।

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