30 साल बाद समंदर में लौटा रूस का ‘महादानव’! एडमिरल नाखिमोव की वापसी से बढ़ी वैश्विक हलचल

मॉस्को: रूस ने अपने सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में शामिल परमाणु ऊर्जा से संचालित क्रूजर ‘एडमिरल नाखिमोव’ को अंतिम समुद्री परीक्षणों के लिए रवाना कर दिया है। लंबे आधुनिकीकरण और उन्नयन कार्यक्रम के बाद करीब तीन दशक में पहली बार यह विशाल युद्धपोत पूरी क्षमता के साथ परिचालन की ओर बढ़ रहा है। इसकी वापसी को रूस की नौसैनिक ताकत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
एडमिरल नाखिमोव की गिनती दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोतों में होती है। यह किरोव श्रेणी का क्रूजर है, जिसका विस्थापन लगभग 28 हजार टन बताया जाता है। आकार और मारक क्षमता के लिहाज से इसे रूस की नौसैनिक शक्ति का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।
लंबे आधुनिकीकरण के बाद फिर होगा तैनात
सोवियत काल में निर्मित इस युद्धपोत को वर्षों तक व्यापक आधुनिकीकरण प्रक्रिया से गुजारा गया। अगस्त 2025 में इसने अपने स्वयं के प्रणोदन तंत्र पर समुद्री गतिविधियां शुरू की थीं और अब यह अंतिम समुद्री परीक्षणों के चरण में पहुंच गया है।
रूसी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नयन के बाद यह युद्धपोत आधुनिक नौसैनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है और इसकी क्षमताओं में पहले की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अत्याधुनिक मिसाइल और रक्षा प्रणाली से लैस
रिपोर्टों के अनुसार, एडमिरल नाखिमोव में बड़ी संख्या में मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों के साथ आधुनिक क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों को तैनात करने की क्षमता विकसित की गई है।
युद्धपोत को बहुस्तरीय रक्षा कवच और लंबी दूरी तक हमला करने वाली हथियार प्रणालियों से लैस किया गया है, जिससे यह समुद्र में एक शक्तिशाली युद्ध मंच के रूप में उभरता है।
रूस की नौसैनिक रणनीति में अहम भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस के लिए एडमिरल नाखिमोव केवल एक युद्धपोत नहीं बल्कि उसकी समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस ने बड़े सतही युद्धपोतों के निर्माण में सीमित निवेश किया है। ऐसे में पुराने लेकिन शक्तिशाली प्लेटफॉर्म को आधुनिक तकनीक से लैस कर दोबारा सेवा में लाना रूस की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
रूस ने अपने नौसैनिक बेड़े के आधुनिकीकरण के तहत इस परियोजना पर लंबे समय तक काम किया है ताकि समुद्री क्षेत्रों में उसकी मौजूदगी और प्रभाव बरकरार रह सके।
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ सकती है तैनाती
माना जा रहा है कि एडमिरल नाखिमोव को रूस के उत्तरी या आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े नौसैनिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है। यह क्षेत्र हाल के वर्षों में वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनकर उभरा है, जहां रूस, अमेरिका और नाटो देशों की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं।
रूस इस क्षेत्र को अपनी आर्थिक और सामरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है। ऐसे में एडमिरल नाखिमोव जैसे शक्तिशाली युद्धपोत की तैनाती वहां उसकी समुद्री उपस्थिति को और मजबूत कर सकती है।
वैश्विक रक्षा जगत की नजरें परीक्षणों पर
एडमिरल नाखिमोव के अंतिम समुद्री परीक्षणों को अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ और सैन्य विश्लेषक भी करीब से देख रहे हैं। परीक्षण सफल रहने के बाद इसके रूसी नौसेना में सक्रिय रूप से शामिल होने की संभावना है, जिससे रूस की समुद्री शक्ति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



