शनि, गुरु तथा राहु-केतु की स्थितियों से बढ़ रही अग्निकांड की घटनाएं
शनि, गुरु तथा राहु-केतु की स्थितियाँ सामूहिक घटनाओं पर प्रभाव डालने वाली मानी जा रही हैं
Ghaziabad News: वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से वर्ष 2026 एक महत्वपूर्ण गोचर वर्ष माना जा रहा है। विशेष रूप से शनि, गुरु तथा राहु-केतु की स्थितियाँ सामूहिक घटनाओं पर प्रभाव डालने वाली मानी जा रही हैं। ये कहना है पंडित शिवकुमार शर्मा का।
2026 की प्रमुख ग्रह स्थितियां
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु कंसलटेंट पं. शिव कुमार शर्मा के अनुसार शनि अधिकांश वर्ष मीन राशि में स्थित रहेगा। गुरु वर्ष के प्रारम्भ में मिथुन राशि में रहेगा तथा जून 2026 में उच्च राशि कर्क राशि में प्रवेश करेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। राहु अधिकांश वर्ष कुम्भ राशि में तथा केतु सिंह राशि में रहेंगे। दिसंबर 2026 में इनका राशि परिवर्तन होगा।
ज्योतिषीय विवेचन के अलावा सन 2026 का मूलांक एक है जो अग्नि तत्व की राशि सूर्य का माना जाता है। इसलिए भी अग्नि तत्व की मेष राशि का वर्ष अग्निकांड की घटनाओं का कारक बना हुआ है।
अग्निकांड की घटनाओं के गोचर ग्रहों की स्थिति
मंगल अग्नि तत्व की राशि मेष में है जो 20 जून तक रहेगा।केतु सिंह राशि में, सिंह अग्नि तत्व की राशि है। केतु अचानक, विस्फोटक और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना जाता है। अग्नि तत्व राशि में केतु की स्थिति आग, विस्फोट, विद्युत दुर्घटनाओं की घटनाओं को बढ़ाने वाली मानी जाती है। जन धन हानि का पर्याप्त योग बनता है। राहु कुम्भ राशि में-कुम्भ का संबंध विद्युत, तकनीक, नेटवर्क और आधुनिक प्रणालियों से जोड़ा जाता है।राहु विद्युत, धुआँ, गैस तथा असामान्य दुर्घटनाओं का कारक माना जाता है.
जब मंगल गोचर में अग्नि तत्व राशियों (मेष, सिंह, धनु) अथवा राहु-केतु से संबंध बनाएगा। तब अग्निकांड, औद्योगिक दुर्घटनाएँ, विस्फोट और युद्ध जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ी हुई मानी जाती है।
शनि जल तत्व की राशि मीन में
सन् 2026 में शनि जल तत्व की राशि मीन में है। राहु तकनीकी राशि कुम्भ में,केतु अग्नि तत्व राशि सिंह में,तथा गुरु जून से उच्च का होकर कर्क में प्रवेश कर रहा है। इस कारण वर्ष के पूर्वार्ध भाग में अर्थात जून जुलाई तक आग, विद्युत, रासायनिक दुर्घटनाओं तथा तकनीकी व्यवधानों की घटनाएं बढ़ रही हैं। जबकि वर्ष के मध्य से जुलाई से दिसंबर तक गुरु का प्रभाव कुछ संतुलन और संरक्षण देने वाला रहेगा।
सूर्य, राहु और सिंहस्थ केतु को प्रमुख संकेतक
शास्त्रीय दृष्टि से यदि विशेष रूप से बढ़ती अग्निकांड की घटनाओं का ग्रह से संबंधित कारण पूछा जाए तो मंगल, सूर्य, राहु और सिंहस्थ केतु को प्रमुख संकेतक माना जाएगा। जो वर्तमान में दृष्टिगोचर हो रहा है। हालांकि वास्तविक घटनाओं में सुरक्षा मानकों, विद्युत दोष, मौसम तथा मानवीय त्रुटियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।



