
दिल्ली : राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने शादी का झूठा वादा कर महिला से शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने महिला का विश्वास जीतने और उसकी सहमति प्राप्त करने के लिए उसे बार-बार “फ्यूचर वाइफी” और “वाइफी” कहकर संबोधित किया था।
मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी की अदालत में हुई। आरोपी सतीश कुमार पर केरल की एक महिला को शादी का आश्वासन देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है।
कोर्ट बोली- जांच पर पड़ेगा गंभीर असर
नौ जून को पारित आदेश में अदालत ने कहा कि आरोपों की प्रकृति बेहद गंभीर है। आरोपी का व्यवहार टालमटोल और फरार रहने वाला रहा है। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों की बरामदगी और चिकित्सीय जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। ऐसे में अग्रिम जमानत दिए जाने से जांच गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
मैट्रिमोनियल पोर्टल पर हुई थी मुलाकात
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता केरल की रहने वाली 23 वर्षीय साइबर सुरक्षा पेशेवर है। उसकी मुलाकात आरोपी से एक वैवाहिक पोर्टल के माध्यम से हुई थी। महिला का आरोप है कि आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उसे दिल्ली बुलाया, जिसके बाद दोनों करीब 19 दिनों तक छतरपुर इलाके में साथ रहे।
शादी का वादा, फिर अचानक तोड़ा संपर्क
महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने विवाह का आश्वासन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में अचानक संपर्क समाप्त कर दिया। उसने महिला को ब्लॉक कर दिया और गायब हो गया। इस मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 (छलपूर्वक यौन संबंध बनाना) और धारा 351 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच को बताया जरूरी
जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच डिजिटल माध्यम से हुई बातचीत और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
वहीं बचाव पक्ष ने दावा किया कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह आपसी सहमति से बने थे और संबंध खत्म होने के बाद महिला ने झूठा मामला दर्ज कराया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि महिला ने अपने पुराने संबंधों की जानकारी छिपाई थी।
व्हाट्सऐप चैट ने बढ़ाई आरोपी की मुश्किलें
अदालत ने कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि दोनों की मुलाकात ऑनलाइन हुई थी, वे दिल्ली में साथ रहे थे और उनके बीच शारीरिक संबंध बने थे। हालांकि यह विवाद का विषय है कि क्या यह संबंध वास्तव में शादी के वादे पर आधारित था।
रिकॉर्ड में प्रस्तुत व्हाट्सऐप चैट का अवलोकन करने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि आरोपी महिला को “फ्यूचर वाइफी” और “वाइफी” कहकर संबोधित करता था। साथ ही साथ रहने की अवधि समाप्त होने के बाद उसके व्यवहार की भी जांच आवश्यक है।
बीएनएस की धारा 69 का किया उल्लेख
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 ऐसे मामलों में दंड का प्रावधान करती है, जहां किसी महिला से छलपूर्वक, विशेष रूप से बिना वास्तविक मंशा के विवाह का वादा करके यौन संबंध बनाए जाते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि इस चरण में आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है और उसकी याचिका खारिज की जाती है।



