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RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम हमला: बड़ी साजिश का संकेत? NIA की एंट्री से बढ़ी आतंकी कनेक्शन की आशंका, UAPA में केस दर्ज

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि हमला किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, जबकि पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

दीवार से टकराया पेट्रोल बम, टल गया बड़ा हादसा

जानकारी के अनुसार निवारणपुर स्थित संघ कार्यालय पर दो पेट्रोल बम फेंके गए थे। हालांकि दोनों में से एक पेट्रोल बम कार्यालय की दीवार से टकरा गया, जिससे आग नहीं फैल सकी और संभावित बड़ा हादसा टल गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि हमलावरों का उद्देश्य कार्यालय परिसर में आग लगाना था।

कांच और स्प्राइट की बोतलों से बनाए गए थे पेट्रोल बम

जांच में सामने आया है कि हमले में इस्तेमाल किए गए पेट्रोल बम अलग-अलग बोतलों से तैयार किए गए थे। इनमें एक कांच की बोतल और दूसरा स्प्राइट की बोतल में बनाया गया था। बम निरोधक दस्ते के अधिकारियों के मुताबिक यदि ये पेट्रोल बम लकड़ी के दरवाजों, परिसर में खड़े वाहनों या वहां रखे सामान पर गिरते तो आग तेजी से फैल सकती थी।

कार्यालय में मौजूद सुविधाओं के कारण बढ़ सकता था नुकसान

संघ कार्यालय में बड़ी संख्या में लोगों के ठहरने की व्यवस्था है और वहां कई बिस्तर भी लगे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि आग लग जाती तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। जांच टीम को अब तक मिले संकेतों से आगजनी की स्पष्ट मंशा सामने आ रही है।

रेस्टोरेंट को लेकर आरएसएस ने जताई नाराजगी

घटना के बाद संघ पदाधिकारियों ने कार्यालय के पास स्थित एक रेस्टोरेंट को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि वहां असामाजिक तत्वों और नशे के आदी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है तथा खुलेआम मांस और शराब परोसी जाती है। संघ से जुड़े लोगों का कहना है कि स्थानीय निवासियों ने पहले भी इस संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

24 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

संघ प्रतिनिधियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 24 घंटे के भीतर संबंधित रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे स्वयं उसे बंद कराने के लिए कदम उठाएंगे।

UAPA के तहत दर्ज हुई प्राथमिकी

पेट्रोल बम हमले के मामले में चुटिया थाना पुलिस ने यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है। यह कानून देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ होने वाली गैरकानूनी तथा आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लागू किया गया था। इस धाराओं में केस दर्ज होने से मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

घटनास्थल पर पहुंचे सांसद, विधायक और नेता प्रतिपक्ष

हमले की जानकारी मिलते ही कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां संघ कार्यालय पहुंचीं। सांसद संजय सेठ, विधायक सीपी सिंह और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, दीपक प्रकाश और संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह भी वहां पहुंचे।

रघुवर दास ने कहा कि घटना के पीछे शामिल तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं आजसू के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

NIA की एंट्री के बाद जांच में आया नया मोड़

राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी लेकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संघ कार्यकर्ताओं से पूछताछ की और पूरे परिसर की वीडियोग्राफी कराई। जांच एजेंसियों के सक्रिय होने के बाद इस हमले में संभावित आतंकी कनेक्शन की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

देशभर से संघ पदाधिकारियों ने ली जानकारी

घटना की सूचना फैलते ही संघ और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में कार्यालय पहुंचने लगे। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई पदाधिकारियों ने फोन के माध्यम से भी घटना की जानकारी ली। पूरे दिन संघ कार्यालय में नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों का आना-जाना लगा रहा।

इस दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने घटना की निंदा करते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। कई पदाधिकारियों ने आशंका जताई कि हमले के पीछे राष्ट्रविरोधी तत्वों की भूमिका हो सकती है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

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