रोजगार के क्षेत्र में नया भारत: मोदी सरकार की नीतियों से बदलती तस्वीर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले एक दशक में रोजगार सृजन, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। “India’s Employment Growth Story” शीर्षक प्रस्तुति के अनुसार, देश की रोजगार नीति अब केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका लक्ष्य युवाओं को अवसर, उद्योगों को कुशल मानव संसाधन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सामाजिक सुरक्षा पहुँचाना है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार ने रोजगार को विकास की धुरी बनाते हुए स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI), प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना जैसी अनेक महत्वाकांक्षी पहल शुरू कीं। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य बनाना, स्वरोजगार को बढ़ावा देना और उद्योगों में निवेश के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना रहा है।
रिपोर्ट में RBI-KLEMS के आँकड़ों के आधार पर दावा किया गया है कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश में 17.1 करोड़ अतिरिक्त रोजगार सृजित हुए। यह औसतन लगभग 1.7 करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष के बराबर है। तुलना में 2003-04 से 2013-14 के बीच लगभग 2.9 करोड़ अतिरिक्त रोजगार का उल्लेख किया गया है। सरकार का मानना है कि यह अंतर रोजगार आधारित विकास मॉडल की सफलता को दर्शाता है।

औपचारिक रोजगार (Formal Employment) के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार EPFO से जुड़े प्रतिष्ठानों की संख्या कई गुना बढ़ी है और 8.23 करोड़ औपचारिक रोजगार सृजित हुए हैं। वहीं National Career Service Portal के माध्यम से करोड़ों रोजगार अवसर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे नौकरी तलाशने वाले युवाओं और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।

युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कौशल विकास पर विशेष बल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार India Skills Report में युवाओं की Employability वर्ष 2013 के लगभग 34 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 56 प्रतिशत से अधिक हो गई है। साथ ही, युवाओं की रोजगार दर में वृद्धि और बेरोजगारी दर में कमी दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि यह परिवर्तन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए कार्यक्रमों का परिणाम है।

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में घोषित रोजगार पैकेज को भी रिपोर्ट महत्वपूर्ण उपलब्धि बताती है। इसके अंतर्गत ₹2 लाख करोड़ के निवेश से 4.1 करोड़ युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और औपचारिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा देश की 500 अग्रणी कंपनियों में 1 करोड़ युवाओं के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू करने की योजना भी शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत की बेरोजगारी दर 2025 में 3.1 प्रतिशत रही, जो विश्व औसत 4.8 प्रतिशत से कम है। दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि जी-20 देशों की तुलना में भारत रोजगार के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और आर्थिक विकास का लाभ रोजगार सृजन के रूप में दिखाई दे रहा है।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में जहाँ केवल 19 प्रतिशत आबादी किसी सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में थी, वहीं 2026 तक यह दायरा बढ़कर 68.4 प्रतिशत हो गया है। यानी 101 करोड़ से अधिक नागरिक अब कम-से-कम एक सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

सरकार का मानना है कि रोजगार, कौशल विकास, औपचारिक अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति ने भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी है। “India’s Employment Growth Story” इसी परिवर्तन का दस्तावेज़ प्रस्तुत करती है, जिसमें दावा किया गया है कि पिछले एक दशक में भारत ने रोजगार सृजन और युवाओं के सशक्तीकरण के क्षेत्र में एक मजबूत और टिकाऊ आधार तैयार किया है, जो विकसित भारत के संकल्प को गति प्रदान करेगा।





